एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 18 फरवरी 2026
दिल्ली में आयोजित AI समिट को लेकर राजनीतिक संग्राम तेज हो गया है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि उसने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे रणनीतिक और भविष्य निर्धारक क्षेत्र को “प्रचार का उपकरण” बना दिया है। कांग्रेस प्रवक्ता Ragini Nayak ने कहा कि समिट में चीनी रोबोट को भारतीय नवाचार के रूप में पेश किए जाने से भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भद्द पिटी है और देश की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
रागिनी नायक ने कहा कि भारत डेटा शक्ति, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप इकोसिस्टम और तकनीकी प्रतिभा के मामले में विश्व नेतृत्व की क्षमता रखता है। ऐसे में AI जैसे संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र में किसी भी प्रकार की भ्रामक प्रस्तुति न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि यह राष्ट्रीय प्रतिष्ठा के साथ सीधा खिलवाड़ है। उन्होंने आरोप लगाया कि समिट के दौरान प्रदर्शित रोबोट को लेकर उठे विवाद पर विदेशी, विशेषकर चीनी मीडिया में भारत का मजाक उड़ाया गया, जो देश के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है।
कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री Ashwini Vaishnaw पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने चीन के रोबोट का वीडियो ‘भारत की शान’ बताते हुए साझा किया, जिससे विवाद और गहरा गया। नायक ने कहा, “यह केवल तकनीकी चूक नहीं है, बल्कि देश को भ्रमित करने का प्रयास है। जब सरकार के मंत्री ही विदेशी तकनीक को भारतीय उपलब्धि बताने लगें, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है।”
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “AI समिट में जहां तकनीकी पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे थे, वहीं मोदी जी के अलग-अलग एंगल से वीडियो बन गए, इसलिए वे संतुष्ट दिखाई दिए।” कांग्रेस ने पूरे आयोजन को “फ्लॉप शो” बताते हुए कहा कि सरकार ने AI जैसे गंभीर विषय को इवेंट मैनेजमेंट और प्रचार तक सीमित कर दिया है।
कांग्रेस का दावा है कि AI केवल एक उभरती तकनीक नहीं, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे में यदि अंतरराष्ट्रीय मंच पर तथ्यों में अतिशयोक्ति या भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है, तो इसका असर विदेशी निवेश, वैश्विक साझेदारी और भारत की तकनीकी विश्वसनीयता पर पड़ सकता है।
हालांकि केंद्र सरकार की ओर से विपक्ष के इन आरोपों पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन यह स्पष्ट है कि AI समिट, जो भारत की तकनीकी क्षमता और नवाचार को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का मंच होना चाहिए था, अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन चुका है।
तकनीकी उपलब्धियों का उत्सव बनने की बजाय यह आयोजन अब सरकार और विपक्ष के बीच विश्वसनीयता की जंग का प्रतीक बन गया है।




