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मुश्किल में अडानी : अमेरिका में SEC सिविल फ्रॉड केस निर्णायक मोड़ पर, 90 दिनों में जवाब देना अनिवार्य

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एबीसी नेशनल न्यूज | 31 जनवरी 2026

नई दिल्ली/वॉशिंगटन। अमेरिका में Adani Group से जुड़ा बहुचर्चित कानूनी मामला अब निर्णायक दौर में प्रवेश करता दिख रहा है। अमेरिकी बाजार नियामक Securities and Exchange Commission (SEC) ने सिविल फ्रॉड केस में समन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर ली है। इसके बाद समूह प्रमुख Gautam Adani और उनके भतीजे Sagar Adani को अदालत ने 90 दिनों के अंदर लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह मामला नवंबर 2024 में न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन स्थित फेडरल कोर्ट में दायर किया गया था। SEC का आरोप है कि सोलर पावर से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट हासिल करने के लिए रिश्वतखोरी की साजिश रची गई और इसके बाद अमेरिकी निवेशकों से पूंजी जुटाते समय गलत और भ्रामक जानकारियां पेश की गईं। एजेंसी का कहना है कि निवेशकों को यह भरोसा दिलाया गया कि कंपनी सभी नियमों और एंटी-ब्राइबरी कानूनों का पालन कर रही है, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग थी—यह पूरा मामला फिलहाल आरोपों के दायरे में है और अदालत में इसकी जांच होनी है।

मामले की गंभीरता यहीं नहीं रुकती। इसी केस के समानांतर अमेरिका का Department of Justice (DOJ) भी आपराधिक जांच चला रहा है, जिसमें रिश्वतखोरी, सिक्योरिटीज फ्रॉड और अन्य गंभीर आरोप शामिल बताए जा रहे हैं। अभी तक न कोई दोष सिद्ध हुआ है और न ही किसी तरह की सजा सुनाई गई है, लेकिन अमेरिकी एजेंसियों की संयुक्त सक्रियता ने दबाव साफ तौर पर बढ़ा दिया है।

राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज

इस बीच, इस मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। तृणमूल कांग्रेस सांसद Mahua Moitra ने सोशल मीडिया पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “भागा नहीं जा सकता” और भारी जुर्माने की आशंका जताई। हालांकि, ये बयान राजनीतिक प्रतिक्रिया हैं और इनका कोई कानूनी निष्कर्ष नहीं है।

बाजार और साख पर असर

घटनाक्रम सामने आते ही बाजार में हलचल देखी गई। निवेशकों को आशंका है कि अगर आरोप आगे टिकते हैं, तो भारी जुर्माना, अमेरिकी पूंजी बाजार तक पहुंच में बाधा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साख को नुकसान हो सकता है। जानकारों का कहना है कि यह कोई साधारण नोटिस नहीं, बल्कि अमेरिकी कानून के तहत गंभीर आरोपों वाला मुकदमा है, जिसका असर लंबा खिंच सकता है।

अडानी पक्ष का रुख

अडानी समूह ने सभी आरोपों से साफ इनकार किया है। समूह का कहना है कि वह कानूनी प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेगा और अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखेगा। साथ ही यह भी दोहराया गया है कि अब तक कोई दोष सिद्ध नहीं हुआ है और मामला पूरी तरह न्यायिक जांच के अधीन है।

आगे क्या?

फिलहाल यह मामला आरोपों और सुनवाई के चरण में है। लेकिन इतना स्पष्ट है कि SEC और DOJ की संयुक्त कार्रवाई ने इसे अडानी समूह के लिए अब तक की सबसे बड़ी और कठिन अंतरराष्ट्रीय कानूनी चुनौती बना दिया है। आने वाले 90 दिन बेहद अहम होंगे—इन्हीं से तय होगा कि यह केस किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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