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वृंदावन में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब: प्रेमानंद महाराज के दर्शन को भारी भीड़, बाहर निकलना हुआ मुश्किल

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एबीसी न्यूज़ | 10 जनवरी 2026

वृंदावन स्थित राधा केली कुंज आश्रम में प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। हालात ऐसे बन गए हैं कि आश्रम के बाहर सड़कों पर लगातार जाम लगा रहता है और कई बार श्रद्धालुओं के लिए वहां से बाहर निकलना तक मुश्किल हो जाता है। देश के अलग-अलग राज्यों से आए हजारों भक्त महाराज जी के दर्शन और आशीर्वाद के लिए घंटों नहीं, बल्कि कई-कई दिनों तक इंतज़ार करने को मजबूर हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आश्रम के आसपास की सड़कों पर दिन-रात श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहती हैं। कई लोग तो 24 से 48 घंटे तक सड़क किनारे बैठकर अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हैं। भीड़ इतनी अधिक है कि स्थानीय ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है। छोटे वाहन तो दूर, पैदल चलना भी कई बार कठिन हो जाता है। पुलिस और स्वयंसेवकों को भीड़ संभालने में काफ़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।

आश्रम प्रशासन द्वारा दर्शन के लिए समय और टोकन जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ने के कारण यह व्यवस्था भी दबाव में नजर आ रही है। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में कतारों में देखे जा रहे हैं। कई श्रद्धालु पास के खाली मैदानों और सड़कों पर ही रात गुज़ार रहे हैं, ताकि अगली सुबह दर्शन का मौका मिल सके।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता हाल के वर्षों में तेज़ी से बढ़ी है। उनकी कथाएं, प्रवचन और वीडियो सोशल मीडिया के ज़रिये देश-विदेश तक पहुंचे हैं, जिसके चलते श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। यही कारण है कि आश्रम की मौजूदा क्षमता अब इस भारी भीड़ को संभालने में अपर्याप्त साबित हो रही है।

प्रशासनिक स्तर पर भी हालात पर नज़र रखी जा रही है। चर्चा है कि भविष्य में भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था को बेहतर करने के लिए अतिरिक्त इंतज़ाम किए जा सकते हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और सुरक्षा व्यवस्था भी बनी रहे।

कुल मिलाकर, वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के प्रति उमड़ी यह भारी भीड़ उनकी आध्यात्मिक लोकप्रियता और श्रद्धालुओं की गहरी आस्था को दर्शाती है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी खड़ा करती है कि इतनी बड़ी संख्या को संभालने के लिए व्यवस्थित और स्थायी व्यवस्था कितनी ज़रूरी हो गई है।

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