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गुजरात में गैस की भयंकर किल्लत ने ले ली नेपाली शेफ की जान, दर्जनों रेस्टोरेंट बंद, लाखों मजदूर बेरोजगार – केंद्र सरकार की चुप्पी शर्मनाक

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राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | अहमदाबाद/ नई दिल्ली 3 अप्रैल 2026

गुजरात के राजकोट में गैस सिलेंडर की जबरदस्त कमी ने एक निराश नेपाली शेफ की जिंदगी को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है। 39 वर्षीय जगदीश रामदूतप्रसाद जोशी, जो रोजगार की तलाश में वडोदरा से मात्र पांच दिन पहले राजकोट पहुंचे थे, आर्थिक तंगी और बेरोजगारी के बोझ तले दबकर 1 अप्रैल की दोपहर मोरबी हाईवे पर हडाला गांव के पास एक तेज रफ्तार ट्रक के आगे कूद पड़े। उनकी दोनों टांगें कट गईं, शरीर पर गंभीर चोटें आईं और अस्पताल ले जाने के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। यह दर्दनाक घटना गैस किल्लत के चलते बंद हो रहे रेस्टोरेंटों की शृंखला का सबसे हृदयविदारक परिणाम है, जिसने पूरे राज्य के होटल-रेस्टोरेंट उद्योग को बुरी तरह झकझोर दिया है। गुजरात के प्रमुख शहरों राजकोट, सूरत और वडोदरा में व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की भारी कमी के कारण कई रेस्टोरेंट पहले ही बंद हो चुके हैं या अपने मेन्यू को आधा कर दिया है। होटल मालिक घटनाएं रद्द कर रहे हैं, पॉपुलर डिशेज जैसे साउथ इंडियन, सिजलर्स और ब्राउनीज सर्व करना बंद कर दिया गया है क्योंकि इनके लिए लगातार उच्च तापमान की जरूरत पड़ती है। कई जगहों पर शेफ अब लकड़ी के चूल्हों पर खाना बना रहे हैं, जबकि स्ट्रीट फूड वेंडर्स और छोटे ढाबे बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। राष्ट्रीय रेस्टोरेंट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर अगले दो-तीन दिनों में सप्लाई नहीं सुधरी तो और कई रेस्टोरेंट पूरी तरह बंद हो जाएंगे। यह संकट सिर्फ गुजरात तक सीमित नहीं है, बल्कि मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में भी होटल उद्योग बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

जगदीश रामदूतप्रसाद जोशी जैसे सैकड़ों मजदूर और शेफ इस संकट की सबसे बड़ी कीमत चुकाने को मजबूर हैं। काम न मिलने, पेट की आग और परिवार की जिम्मेदारियों के दबाव में कई लोग मानसिक रूप से टूट चुके हैं। राजकोट के मोरबी हाईवे पर हुई इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें जगदीश अचानक ट्रक के सामने कूदते दिख रहे हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ जांच से इस तरह की घटनाएं रुकेंगी? गैस किल्लत ने न सिर्फ रेस्टोरेंट उद्योग को चोट पहुंचाई है, बल्कि असंगठित क्षेत्र के लाखों कामगारों की रोजी-रोटी छीन ली है। कुछ जगहों पर बड़े मंदिर और चैरिटेबल ट्रस्ट लकड़ी के स्टोव पर खाना बना रहे हैं, लेकिन छोटे रेस्टोरेंट और उनके कर्मचारी इस विकल्प से भी वंचित हैं।

यह संकट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वेस्ट एशिया में चल रही अस्थिरता से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है, जिसके कारण एलपीजी आयात प्रभावित हुआ है। गुजरात सरकार ने सप्लाई में 20 प्रतिशत बढ़ोतरी करने और पीएनजी पर स्विच करने की बात कही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि रेस्टोरेंट बंद हो रहे हैं, कर्मचारी बेरोजगार हो रहे हैं और एक-एक करके लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस राहत पैकेज या इमरजेंसी सप्लाई प्लान सामने नहीं आया है। जबकि हर भाषण में “विकसित भारत” और “सबका साथ, सबका विकास” के नारे लगाए जा रहे हैं, वहां एक गरीब नेपाली शेफ की मौत पर सत्ता की चुप्पी चौंकाने वाली है। क्या इतनी जानें लगने के बाद भी सरकार जागेगी? क्या गैस किल्लत को सिर्फ वैश्विक मुद्दा बताकर पल्ला झाड़ लिया जाएगा?

ABC NATIONAL NEWS सरकार से पूछता है – कितनी और जगदीश जोशी की जानें जाएंगी जब तक गैस संकट का स्थायी समाधान नहीं निकाला जाएगा? क्या छोटे उद्योगों और मजदूरों की पीड़ा को नजरअंदाज करते हुए सिर्फ बड़े-बड़े दावे किए जाते रहेंगे? यह संकट अब सिर्फ एक आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि मानवीय संकट बन चुका है। समय आ गया है कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर ठोस कदम उठाएं, वरना यह लहर पूरे देश के असंगठित क्षेत्र को निगल जाएगी। ABC NATIONAL NEWS – सच्चाई की आवाज़, बिना किसी समझौते के।

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