जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए सिविल सेवा से इस्तीफा देने वाले पूर्व आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन ने आज औपचारिक रूप से कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया।
उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल की उपस्थिति में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। कन्नन ने कहा कि उन्होंने यह फैसला बहुत सोच-समझकर लिया है क्योंकि उन्हें यकीन है कि कांग्रेस ही इस देश को सही दिशा में ले जा सकती है।
कन्नन गोपीनाथन ने कहा, “मैंने 2019 में नौकरी से इस्तीफा दिया और तब यह समझ गया था कि सरकार देश को जिस दिशा में लेकर जा रही है, वह रास्ता गलत है। मुझे यह भी पता था कि इस ‘गलत’ के खिलाफ लड़ना है। इस फैसले के बाद मैं देश के 80-90 जिलों में गया, लोगों से बातचीत की और तमाम नेताओं से मुलाकात की। मुझे समझ आया कि कांग्रेस पार्टी ही इस देश को सही दिशा में ले जा सकती है।”
उन्होंने कहा कि आज देश में सवाल पूछना अपराध माना जाने लगा है। “हम बहुत समय बाद प्रजा से नागरिक बने थे, क्योंकि हमें सवाल पूछने का हक है। मगर इस सरकार में जो भी सवाल करता है, उसे देशद्रोही कह दिया जाता है। यह लोकतंत्र के लिए बहुत खतरनाक स्थिति है।”
कन्नन ने कहा कि उनके लिए आईएएस बनना जनता की सेवा का जरिया था, लेकिन सिस्टम की चुप्पी के बीच सच्चाई बोलना उनकी नैतिक जिम्मेदारी बन गई थी। “आईएएस बनना मेरे लिए सेवा का माध्यम था, लेकिन उससे इस्तीफा देना बोलने की जरूरत थी। अब कांग्रेस के साथ मुझे दोनों करने का अवसर मिला है — जनता की सेवा और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने उन्हें खुला मंच दिया है, जहाँ वे बिना डर और दबाव के जनता के हित में काम कर सकते हैं।“मुझे काफी समय लगा, लेकिन आज मुझे खुशी है कि मैं कांग्रेस परिवार का हिस्सा बना हूँ। पार्टी मुझे जो भी जिम्मेदारी देगी, उसे मैं पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाऊंगा।”
कन्नन ने कांग्रेस नेतृत्व के प्रति आभार जताते हुए कहा, “मैं श्री मल्लिकार्जुन खड़गे, श्री राहुल गांधी, श्री के.सी. वेणुगोपाल और उन तमाम कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आभारी हूँ जिन्होंने मुझे अपनाया। यह मेरे जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत है। मुझे उम्मीद है कि इस सफर में मैं लोगों के बीच सच, संवेदना और संविधान की भावना को और मज़बूत कर पाऊँगा।” उन्होंने अंत में कहा, “यह एक विनम्र यात्रा की शुरुआत है। मुझे अपना साथी, मित्र और भाई समझें।”





