राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | चंडीगढ़ | 18 मार्च 2026
हरियाणा की राजनीति में इस बार का मुकाबला बेहद दिलचस्प और तनाव भरा रहा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस चुनाव में सिर्फ रणनीति नहीं बनाई, बल्कि खुद मैदान में उतरकर पर्यवेक्षक की भूमिका भी निभाई।
कहा जा रहा है कि हुड्डा ने एक-एक विधायक पर नजर रखी। किसी तरह की क्रॉस वोटिंग न हो, इसके लिए पूरी ताकत लगा दी गई। नेताओं को साथ रखना, बातचीत करना और आखिरी समय तक संपर्क बनाए रखना—इन सब पर खास ध्यान दिया गया।
चुनाव का नतीजा भले ही बहुत मामूली अंतर से आया हो, लेकिन कांग्रेस की यह जीत आसान नहीं थी। पार्टी के अंदर ही खींचतान और गुटबाजी की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। ऐसे माहौल में हुड्डा का खुद जिम्मेदारी संभालना निर्णायक साबित हुआ।
पार्टी के कुछ बड़े नेताओं पर सवाल उठ रहे हैं कि वे अंदर ही अंदर हुड्डा को कमजोर करने की कोशिश कर रहे थे। जानकार मानते हैं कि अगर हुड्डा खुद कमान नहीं संभालते, तो नतीजा कुछ और भी हो सकता था।
अब सबसे बड़ा सवाल कांग्रेस हाईकमान पर है। आखिर कब तक हरियाणा में चल रही इस अंदरूनी खींचतान को नजरअंदाज किया जाएगा? अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो इसका असर आने वाले चुनावों में साफ दिखाई दे सकता है। इस जीत ने यह जरूर दिखा दिया है कि जब बात संगठन को बचाने की आती है, तो हुड्डा अब भी सबसे मजबूत कड़ी बने हुए हैं।




