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चुनाव में ध्रुवीकरण के लिए फिल्म?— RSS के समर्थन के दावे पर ‘केरल स्टोरी 2’ घिरी

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राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 2 अप्रैल 2026

फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ और उसके सीक्वल ‘द केरल स्टोरी 2: गोज़ बियॉन्ड’ को लेकर विवाद अब और तीखा हो गया है। प्रोड्यूसर Vipul Amrutlal Shah के उस बयान ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है, जिसमें उन्होंने Rashtriya Swayamsevak Sangh के “मार्गदर्शन और समर्थन” की खुलकर बात की। विपक्ष अब इसे सीधे तौर पर “राजनीतिक प्रोजेक्ट” करार देते हुए आरोप लगा रहा है कि यह फिल्म केरल में हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण के लिए बनाई गई।

बैंकॉक में आयोजित World Hindu Congress के मंच से दिए गए बयान—“RSS हमारे गार्जियन एंजेल्स रहे हैं”—ने इस विवाद को और हवा दे दी है। इससे पहले तक फिल्म को किसी संगठन या विचारधारा से जोड़ने के आरोपों को खारिज किया जाता रहा था, लेकिन अब इस स्वीकारोक्ति के बाद विपक्ष का कहना है कि फिल्म का नैरेटिव पहले से तय एजेंडे के तहत तैयार किया गया।

फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2: गोज़ बियॉन्ड’, जिसका निर्देशन Kamakshya Narayan Singh ने किया है, अंतरधार्मिक विवाह, कथित जबरन धर्म परिवर्तन और महिलाओं के शोषण जैसे मुद्दों पर आधारित है। ट्रेलर में देश की सामाजिक संरचना को लेकर गंभीर आशंकाएं दिखाई गईं, जिसने रिलीज से पहले ही माहौल को संवेदनशील बना दिया। प्रोड्यूसर का कहना है कि फिल्म किसी राज्य या समुदाय के खिलाफ नहीं है, लेकिन विपक्ष इसे “डर और नफरत के नैरेटिव” को बढ़ाने वाला बता रहा है।

इस पूरे विवाद का राजनीतिक पहलू तब और गहरा गया जब आरोप लगे कि फिल्म का इस्तेमाल केरल में चुनावी माहौल को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि “लव जिहाद”, “कन्वर्जन” और जनसंख्या जैसे मुद्दों को उछालकर समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश की जा रही है। वहीं समर्थकों का तर्क है कि यह फिल्म उन मुद्दों को सामने लाती है, जिन पर खुलकर चर्चा नहीं होती।

फिल्म की रिलीज के दौरान कानूनी लड़ाई भी देखने को मिली। Kerala High Court में दायर याचिका में Central Board of Film Certification की मंजूरी पर सवाल उठाए गए। पहले अस्थायी रोक लगी, फिर डिविजन बेंच ने उसे हटाते हुए रिलीज की इजाजत दे दी। अदालत ने यह जरूर कहा कि फिल्म के प्रभाव को गंभीरता से देखना होगा, ताकि सामाजिक सौहार्द प्रभावित न हो।

पहली ‘केरल स्टोरी’ भी अपने दावों और आंकड़ों को लेकर विवादों में रही थी, खासकर धर्म परिवर्तन से जुड़े बड़े आंकड़ों पर। आलोचकों ने इन्हें अतिरंजित बताया, जबकि निर्माताओं ने इसे “ड्रामेटिक प्रस्तुति” कहा। अब दूसरी फिल्म के साथ वही बहस और ज्यादा तीखे रूप में सामने आ रही है।

राजनीतिक गलियारों में अब यह सवाल खुलकर उठ रहा है कि क्या सिनेमा को चुनावी रणनीति का हिस्सा बनाया जा रहा है? क्या फिल्में अब सिर्फ कहानी कहने का माध्यम नहीं, बल्कि विचारधारा और वोट बैंक की लड़ाई का हथियार बन चुकी हैं?

‘केरल स्टोरी 2’ को लेकर जारी यह विवाद सिर्फ एक फिल्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस बड़े टकराव की तस्वीर पेश करता है, जहां सिनेमा, राजनीति और समाज तीनों एक-दूसरे से सीधे टकरा रहे हैं।

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