वॉशिंगटन / लंदन / गाज़ा 27 सितम्बर 2025
पश्चिम एशिया के सबसे जटिल संकटों में से एक गाज़ा पर नियंत्रण और प्रशासन की जिम्मेदारी को लेकर नई अंतरराष्ट्रीय कवायद शुरू हो गई है। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर का नाम गाज़ा के लिए प्रस्तावित “अंतरिम प्रशासनिक प्राधिकरण” के प्रमुख के रूप में सामने आ रहा है। अमेरिकी मीडिया और कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, वॉशिंगटन इस योजना का समर्थन कर रहा है और इसे स्थायी शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
योजना के तहत गाज़ा में एक संक्रमणकालीन अथॉरिटी बनाई जाएगी, जो मानवीय सहायता, प्रशासनिक पुनर्निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा संभालेगी। इसका लक्ष्य है कि गाज़ा को हमास और इज़रायली सैन्य टकराव की लगातार चपेट से बाहर निकालकर एक स्थिर राजनीतिक व्यवस्था दी जाए। टोनी ब्लेयर का नाम इसलिए आगे बढ़ाया गया है क्योंकि उन्हें मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया में अनुभव है और उन्होंने 2007 से 2015 तक क्वार्टेट (UN, EU, USA, रूस) के विशेष दूत के रूप में इस क्षेत्र में काम किया था।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि गाज़ा की मौजूदा स्थिति असहनीय हो चुकी है और एक निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय चेहरा वहां के लिए स्थायी समाधान का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। सूत्रों ने बताया कि यह योजना इज़रायल और फिलिस्तीनी प्राधिकरण, दोनों के साथ परामर्श के बाद ही लागू की जाएगी। अमेरिका चाहता है कि गाज़ा में बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण और सुरक्षा बलों का प्रशिक्षण अंतरराष्ट्रीय निगरानी में किया जाए ताकि हिंसा फिर न भड़के।
टोनी ब्लेयर के कार्यालय से अभी औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन ब्रिटिश मीडिया के अनुसार ब्लेयर इस भूमिका में दिलचस्पी ले सकते हैं, बशर्ते इस प्रक्रिया को व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिले। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यह पहल जोखिमभरी भी हो सकती है, क्योंकि गाज़ा के भीतर कई गुट अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप को संदेह की नजर से देखते हैं।
फिलिस्तीनी प्रतिनिधियों की प्रारंभिक प्रतिक्रिया मिश्रित रही है। कुछ नेताओं का कहना है कि अगर यह पहल गाज़ा की नाकेबंदी खत्म करने और आर्थिक पुनर्निर्माण में मदद करती है तो इसका स्वागत किया जाएगा। वहीं, हमास से जुड़े सूत्रों ने इस योजना को “विदेशी कब्ज़ा” करार देते हुए विरोध का संकेत दिया है।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक मानते हैं कि अगर यह योजना लागू होती है तो यह गाज़ा संघर्ष के इतिहास में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि स्थानीय नेतृत्व और आम नागरिक इसे कितना स्वीकार करते हैं और क्या इज़रायल-पलस्तीन वार्ता को पुनर्जीवित करने की कोई ठोस कोशिश साथ में चलती है या नहीं।




