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गाज़ा में जंग या जिन्दगी? — इज़रायली कैबिनेट आज युद्धविराम और बंधक रिहाई डील पर वोट करेगी, निगाहें फैसले पर

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गाज़ा पट्टी में खून और आग के लगभग दस महीने गुज़र जाने के बाद, आख़िरकार आज शांति की एक किरण दिखाई दे रही है। इज़राइल की कैबिनेट आज एक अत्यंत महत्वपूर्ण वोटिंग करने जा रही है, जिसमें यह तय किया जाएगा कि क्या हमास के साथ युद्धविराम (Ceasefire) और बंधक रिहाई (Hostage Release) को लेकर हुए अस्थायी समझौते को औपचारिक रूप से मंज़ूरी दी जाए या नहीं। यह वही बहुप्रतीक्षित प्रस्ताव है जिस पर पिछले कई हफ्तों से क़तर, मिस्र और अमेरिका के बीच गहन मध्यस्थता चल रही थी, और अब ऐसा लग रहा है कि इस लंबे और विनाशकारी संघर्ष के सबसे निर्णायक क्षण की घड़ी आ चुकी है। 

बीबीसी, रॉयटर्स और अल जज़ीरा जैसी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रस्ताव के तहत इज़राइल और हमास के बीच एक तीन चरणों वाला समझौता तय किया गया है — जिसके पहले चरण में महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्ग बंधकों को रिहा किया जाएगा; दूसरे चरण में मानवीय सहायता का गाज़ा में प्रवेश सुनिश्चित किया जाएगा और एक अस्थायी युद्धविराम लागू होगा; और तीसरे चरण में दीर्घकालिक संघर्षविराम की संभावनाओं पर विस्तार से बातचीत की जाएगी। यदि कैबिनेट इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे देती है, तो यह न केवल गाज़ा में चल रहे भीषण युद्ध को तत्काल विराम देगा, बल्कि मध्य पूर्व की कूटनीति में भी एक ऐतिहासिक और बड़ा मोड़ साबित होगा।

कठिन राजनीतिक संतुलन — नेतन्याहू सरकार के भीतर मतभेद

वर्तमान में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने सबसे बड़ी और जटिल चुनौती यह है कि वह अपने गठबंधन सरकार के भीतर उभरे गंभीर मतभेदों को कैसे सँभालते हैं। उनकी सरकार के दक्षिणपंथी और अतिवादी सहयोगी इस बात के सख्त ख़िलाफ़ हैं कि हमास के साथ किसी भी तरह की बातचीत या समझौता किया जाए, और वे लगातार यह कह रहे हैं कि “यह समझौता आतंकवाद के आगे झुकना” होगा। 

दूसरी तरफ़, इज़रायली सेना और ख़ुफ़िया एजेंसियाँ इस बात पर ज़ोर दे रही हैं कि अब युद्ध को एक सीमित दायरे में लाना ही सबसे अच्छा रणनीतिक विकल्प है, क्योंकि गाज़ा में लंबी खिंची ज़मीनी लड़ाई ने मानवीय और राजनीतिक दोनों ही स्तरों पर इज़राइल को बुरी तरह थका दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इज़रायली युद्ध कैबिनेट की बैठक आज देर रात तक चलने की संभावना है, जिसमें यह तय किया जाएगा कि क्या प्रधानमंत्री को इस शांति प्रस्ताव पर अंतिम रूप से हस्ताक्षर करने की अनुमति दी जाए या नहीं। यदि यह समझौता पास हो जाता है, तो हमास के क़ब्ज़े में मौजूद 120 से अधिक बंधकों की घर वापसी की प्रक्रिया तुरंत शुरू हो सकती है, जिससे बंधकों के परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।

हमास की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय दबाव

इस समझौते को लेकर हमास के राजनीतिक दफ़्तर ने भी एक बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि “अगर इज़राइल ईमानदारी से युद्धविराम की दिशा में आगे बढ़ता है, तो संगठन बंधकों की रिहाई के लिए पूरी तरह तैयार है।” हालाँकि, हमास ने अपनी शर्त भी स्पष्ट की है कि किसी भी डील में गाज़ा पर पूर्ण सैन्य वापसी और राहत सामग्री के निर्बाध प्रवेश की गारंटी ज़रूर होनी चाहिए। 

दूसरी ओर, अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ जैसे विश्व के बड़े शक्ति केंद्र भी लगातार इज़राइल पर दबाव बनाए हुए हैं कि वह मानवीय आधार पर इस युद्धविराम को स्वीकार करे। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने भी खुले तौर पर कहा है कि “अब समय आ गया है कि गाज़ा में हथियार पूरी तरह से शांत हों और बंधक अपने घर लौटें। अमेरिका इस समझौते का पूरी तरह समर्थन करता है।” मिस्र और क़तर, जो लंबे समय से इस मुश्किल मध्यस्थता प्रक्रिया को संभाल रहे हैं, उन्होंने इस नए प्रस्ताव को “युद्ध समाप्ति की पहली वास्तविक और सबसे बड़ी उम्मीद” बताया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राहत की भावना बढ़ी है।

गाज़ा में मानवीय तबाही — एक शांति समझौते की सख्त ज़रूरत

गाज़ा पट्टी के अंदरूनी हालात इस समय मानवीय तबाही का सबसे भयावह रूप ले चुके हैं। अब तक 33,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, हज़ारों लोग घायल हुए हैं, और 15 लाख से ज़्यादा लोग अपने घरों को छोड़कर बेघर हो चुके हैं। यहाँ के ज़्यादातर अस्पताल खंडहर में बदल चुके हैं, भोजन और पानी की किल्लत विकराल रूप ले चुकी है, और मानवीय संकट इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुज़र रहा है। 

अंतरराष्ट्रीय समुदाय का बार-बार यही कहना है कि अगर यह समझौता तुरंत लागू नहीं हुआ, तो गाज़ा एक “मानवता की कब्रगाह” बन जाएगा। इन हालात को देखते हुए, इज़राइल के अंदर भी युद्ध के ख़िलाफ़ आवाज़ें अब और ज़्यादा तेज़ हो रही हैं। तेल अवीव और यरुशलम की सड़कों पर हज़ारों लोग उतरकर “Bring Them Home” यानी “उन्हें घर लाओ” के नारे लगा रहे हैं। ये प्रदर्शनकारी वही हैं जिनके प्रियजन पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास के हमले के दौरान बंधक बनाए गए थे, और वे अब अपनी सरकार पर जल्द से जल्द फ़ैसला लेने का दबाव बना रहे हैं।

फैसले की घड़ी — क्या थमेगा खून, या बढ़ेगी जंग?

अब सभी की निगाहें पूरी तरह से इज़रायली कैबिनेट की आज की निर्णायक बैठक पर टिकी हुई हैं। यदि यह प्रस्ताव भारी बहुमत से पास हो जाता है, तो युद्धविराम और बंधक रिहाई की प्रक्रिया अगले 48 घंटों के भीतर ही शुरू हो सकती है, जिससे लाखों लोगों को तत्काल राहत मिलेगी। लेकिन अगर प्रधानमंत्री नेतन्याहू अपनी गठबंधन सरकार के अतिवादी सहयोगियों के दबाव में आकर समझौते को मंज़ूरी देने से इनकार करते हैं, तो यह संघर्ष और भी ज़्यादा भयानक और विनाशकारी रूप ले सकता है — जिससे गाज़ा में और तबाही बढ़ेगी और इज़राइल के भीतर भी राजनीतिक और सामाजिक विभाजन और गहरा जाएगा।

आज की कैबिनेट बैठक ही यह तय करेगी कि क्या गाज़ा में खामोशी लौटेगी या बारूद फिर बोलेगा। दुनिया की साँसें इस समय थमी हुई हैं, और पूरा मध्य पूर्व इस ऐतिहासिक फ़ैसले का बड़ी बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है।

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