रियाद 6 अक्टूबर 2025
सऊदी अरब सरकार ने यात्रियों के लिए दवाइयों से जुड़ी नई कड़ी गाइडलाइन जारी की है। अब कोई भी यात्री यदि ओपिओइड (Opiate-Based) या नशीले तत्वों वाली दवाइयाँ लेकर देश में प्रवेश करता है या उड़ान के दौरान अपने साथ रखता है, तो उसे पहले से सरकारी अनुमति (Permit) लेनी होगी। यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है और इसका उल्लंघन करने पर सख़्त सज़ा का प्रावधान रखा गया है।
नए नियमों की घोषणा और कारण
सऊदी अरब के फूड एंड ड्रग अथॉरिटी (SFDA) और जनरल अथॉरिटी ऑफ सिविल एविएशन (GACA) ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि यह कदम “दवा तस्करी, दुरुपयोग और नशे के अवैध प्रसार” को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार का कहना है कि कई यात्रियों ने ऐसे प्रिस्क्रिप्शन मेडिसिन्स लेकर आने की कोशिश की जो सऊदी कानून के तहत प्रतिबंधित मानी जाती हैं। इनमें दर्दनिवारक ओपिओइड्स जैसे कोडीन (Codeine), मॉर्फिन (Morphine), ट्रामाडोल (Tramadol) और ऑक्सीकोडोन (Oxycodone) शामिल हैं।
सरकार ने साफ किया है कि यात्रियों को यात्रा से पहले ऑनलाइन परमिट आवेदन करना होगा, जिसमें उन्हें डॉक्टर का वैध प्रिस्क्रिप्शन, दवा की मात्रा, बीमारी का विवरण और पासपोर्ट जानकारी अपलोड करनी होगी। अनुमति मिलने के बाद ही ये दवाइयाँ सीमित मात्रा में साथ ले जाई जा सकती हैं। बिना अनुमति ऐसी दवाएँ रखने या लाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई, जुर्माना और यहां तक कि जेल की सज़ा भी दी जा सकती है।
विदेशी यात्रियों और प्रवासियों को विशेष चेतावनी
यह आदेश विशेष रूप से उन विदेशी यात्रियों और भारतीय, पाकिस्तानी, फिलीपीनी, मिस्री और बांग्लादेशी प्रवासियों के लिए अहम है, जो सऊदी अरब में काम या उमरा/हज के लिए यात्रा करते हैं। कई बार यात्री अपने देश से दर्द या नींद की दवाएँ लेकर जाते हैं, जिनमें नारकोटिक तत्व मौजूद होते हैं। सऊदी कानून के तहत इन्हें नशीले पदार्थ (Controlled Drugs) माना जाता है।
रियाद एयरपोर्ट प्रशासन ने चेतावनी दी है कि किसी भी यात्री के पास बिना परमिट ऐसी दवा पाई जाती है तो उसे “नशीले पदार्थ की तस्करी” के समान अपराध माना जाएगा। कई मामलों में यह अपराध 5 से 10 साल की जेल और भारी जुर्माने का कारण बन सकता है। एयरपोर्ट अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की “दर्दनिवारक, नींद या एंटी-डिप्रेशन” दवा ले जाने से पहले अपने डॉक्टर से सऊदी कानून के अनुरूप परामर्श लें।
सरकार का उद्देश्य: स्वास्थ्य सुरक्षा और दुरुपयोग पर रोक
सऊदी स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि देश में दवा सुरक्षा और नियंत्रित पदार्थों पर निगरानी बेहद सख्त है। पिछले कुछ वर्षों में ओपिओइड्स का दुरुपयोग बढ़ने के कारण सरकार ने इन्हें कड़े नियंत्रण सूची (Schedule A Drugs) में शामिल किया है। सऊदी अरब में इन पदार्थों का बिना मेडिकल परमिट सेवन अपराध की श्रेणी में आता है।
सरकार के प्रवक्ता ने कहा, “हमारा उद्देश्य यात्रियों को सज़ा देना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षा और जिम्मेदारी के प्रति जागरूक करना है। सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय यात्रियों का स्वागत करता है, लेकिन दवाइयों के मामले में हमारी नीति स्पष्ट और शून्य-सहनशीलता (Zero Tolerance) वाली है।”
भारतीय दूतावास और अन्य देशों की सलाह
रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने भी यात्रियों को सलाह जारी करते हुए कहा है कि वे किसी भी ओपिओइड या नशीली दवा के साथ यात्रा करने से पहले आवश्यक अनुमति अवश्य प्राप्त करें। दूतावास ने बताया कि पहले भी कई भारतीय नागरिकों को अज्ञानता के कारण एयरपोर्ट पर रोका गया था, और कुछ मामलों में उन्हें हिरासत में भी लिया गया। इसी तरह, ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा के दूतावासों ने भी अपने नागरिकों को चेताया है कि वे सऊदी कानूनों को हल्के में न लें, क्योंकि दवा अपराधों में सऊदी अरब का कानून अत्यंत कठोर है।
कड़े कानून और संवेदनशील व्यवस्था
सऊदी अरब में नशीले पदार्थों पर दुनिया के सबसे सख्त कानून लागू हैं। यहां नारकोटिक्स कंट्रोल लॉ 1975 और कस्टम्स एक्ट 2001 के तहत ऐसे मामलों में न केवल जेल की सजा, बल्कि बार-बार अपराध करने वालों पर मृत्युदंड तक का प्रावधान है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि यात्रियों को अपनी दवा मूल पैकिंग में, अंग्रेज़ी या अरबी लेबल सहित ले जानी चाहिए, ताकि जांच में पारदर्शिता बनी रहे।
सुरक्षा के साथ सतर्कता ही यात्रा की कुंजी
यह कदम सऊदी अरब की उस नीति का हिस्सा है जिसके तहत वह अपने समाज को “नशीले पदार्थों से मुक्त और अनुशासित” रखना चाहता है। यात्रियों और प्रवासियों के लिए यह आवश्यक है कि वे सऊदी नियमों की जानकारी पहले से लें और आवश्यक परमिट हासिल कर लें। एक छोटी सी लापरवाही उन्हें न केवल कानूनी जाल में फंसा सकती है, बल्कि उनके भविष्य और परिवार पर भी गहरा असर डाल सकती है। सऊदी सरकार का संदेश साफ है — “दवा तभी साथ ले जाएं, जब उसके लिए अनुमति हो; वरना इलाज की जगह सज़ा मिल सकती है।”




