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SIR में बड़ी गड़बड़ियां, वोट पर डाका डालना चाहता है आयोग, सुधार नहीं हुआ तो राज्यव्यापी सत्याग्रह: बिहार कांग्रेस

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बिहार कांग्रेस ने आज राजधानी पटना में एक तीखी प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर केंद्रीय चुनाव आयोग पर ‘लोकतंत्र को कमजोर करने’ और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इशारे पर काम करने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी के शीर्ष नेताओं ने दावा किया कि राज्य में मतदाता सूची के ‘स्पेशल समरी रिवीजन’ (SIR) के नाम पर एक ‘सुनियोजित वोट चोरी’ की जा रही है। बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम और कांग्रेस विधायक दल (CLP) नेता शकील अहमद खान ने दस्तावेजी साक्ष्य पेश करते हुए कहा कि SIR की प्रक्रिया दोषपूर्ण है और इसका एकमात्र मकसद ‘गरीबों, अल्पसंख्यकों और गरीबों के वोट को सूची से हटाना’ है। कांग्रेस ने इस पूरी प्रक्रिया को ‘लोकतंत्र पर डाका’ करार दिया और चेतावनी दी कि राहुल गांधी के नेतृत्व में शुरू हुई ‘वोटर अधिकार यात्रा’ अब इस साज़िश के खिलाफ एक जनक्रांति का रूप ले चुकी है। कांग्रेस ने कहा कि गड़बड़ियां सही नहीं होगी तो राज्यव्यापी सत्याग्रह आंदोलन चलाया जायेगा। 

“लोकतंत्र की बुनियाद हिला दी गई”: राजेश राम का सीधा हमला

बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस ने पहले ही चुनाव आयोग को SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर आगाह किया था, लेकिन उनकी आपत्तियों को नज़रअंदाज़ कर दिया गया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “राहुल गांधी जी की दूरदर्शिता के कारण आज यह ‘वोट चोरी’ का खेल देश के सामने आया है। चुनाव आयोग ने जिस जल्दबाज़ी में SIR को अंजाम दिया, उससे स्पष्ट है कि उसकी नीयत निष्पक्ष नहीं थी, बल्कि उसका इरादा सत्ता पक्ष को फायदा पहुंचाना था।”

राजेश राम ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश करते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया के तहत बिहार में लाखों मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ये लोग कौन हैं और उनके नाम क्यों हटाए गए। उन्होंने सीधे आरोप लगाया कि आयोग ने बहाना बनाया था कि ‘घुसपैठियों’ के नाम काटे जाएंगे, लेकिन एक भी घुसपैठिए का नाम सामने नहीं आया। उन्होंने सवाल किया, “अगर घुसपैठिए नहीं हैं, तो फिर किसके नाम काटे गए? यह लोकतंत्र की बुनियाद हिलाने का काम है, जो हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

दस्तावेज़ी सबूत: ‘जमुई में 247 वोटर एक पते पर’

कांग्रेस नेताओं ने मीडिया के सामने बिहार के विभिन्न जिलों से जुटाए गए कथित धांधली के दस्तावेज़ रखे। इन साक्ष्यों के माध्यम से उन्होंने SIR की प्रक्रिया में हुई गंभीर अनियमितताओं को उजागर किया:

 * एक ही पते पर सैकड़ों वोटर: राजेश राम ने बताया कि जमुई जिले में एक ही पते पर 247 मतदाताओं के नाम दर्ज पाए गए हैं। उन्होंने पूछा, “क्या यह एक घर है या कोई विशालकाय हॉस्टल? यह स्पष्ट रूप से फर्जी नामों को जोड़कर लिस्ट को प्रभावित करने की कोशिश है।”

 * नामों का दोहराव: मुजफ्फरपुर जैसे कई जिलों में एक ही व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में दो से तीन बार तक दर्ज किया गया है।

 * जीवितों को मृत घोषित किया गया: कई स्थानों पर जीवित और सक्रिय मतदाताओं के नाम भी मृत घोषित करके मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जिनकी संख्या हज़ारों में है।

 * पिता के नाम में गड़बड़ी: कई मतदाताओं के पिता का नाम एक ही व्यक्ति के रूप में दर्ज किया गया है, जो सूची तैयार करने में घोर लापरवाही और मनमानी को दर्शाता है।

“आयोग नहीं, BJP दे रही जवाब”: शकील खान का तीखा वार

कांग्रेस विधायक दल के नेता डॉ. शकील अहमद खान ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सबसे कड़ा सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग ने अपनी निष्पक्षता खो दी है और वह अब सत्ता पक्ष के ‘प्रवक्ता’ की तरह काम कर रहा है।

शकील खान ने कहा, “जब भी राहुल गांधी जी साक्ष्य के साथ चुनाव आयोग से सवाल पूछते हैं, तो आयोग की तरफ से कोई जवाब या जांच नहीं आती, बल्कि भाजपा के नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कांग्रेस को जवाब देने लगते हैं। यह कैसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया है?”

उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की जनता का भरोसा संवैधानिक संस्थाओं पर टिका होता है, लेकिन आयोग ने अपने कृत्यों से इस भरोसे को तोड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग महत्वपूर्ण जानकारी छिपाकर ‘वोट चोरी’ करने वाले दोषियों को बचा रहा है। डॉ. खान ने स्पष्ट चेतावनी दी कि बिहार की जनता इस ‘डाके’ को देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब ज़रूर देगी।

कांग्रेस की चार निर्णायक माँगें: पारदर्शिता की अपील

कांग्रेस पार्टी ने इस ‘वोट चोरी’ को रोकने और पारदर्शिता बहाल करने के लिए चुनाव आयोग से चार बड़ी और निर्णायक माँगें की हैं:

 * काटे गए नामों की सूची: SIR के दौरान पलायन करने वाले मतदाताओं के नाम कितने काटे गए, इसकी पूरी सूची सार्वजनिक की जाए।

 * नए मतदाताओं के आँकड़े: फॉर्म 6E के माध्यम से जोड़े गए नए मतदाताओं की संख्या और उनके क्षेत्रवार आंकड़े तुरंत जारी किए जाएँ।

 * महिला मतदाताओं का विवरण: नई सूची में कितनी महिलाओं के नाम काटे या जोड़े गए, इसका स्पष्ट और विस्तृत खुलासा किया जाए।

 * मृत मतदाताओं की सूची: मृत मतदाताओं की पूरी सूची सार्वजनिक की जाए, ताकि यह पता चले कि कितने जीवित लोगों को मृत मानकर उनका वोट काट दिया गया है।

बिहार कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह मतदाता सूची में हुई इस कथित ‘SIR धांधली’ को चुनावी दांवपेंच तक सीमित नहीं रखेगी। पार्टी ने ऐलान किया है कि अगर आयोग इन गंभीर आरोपों पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं देता और निष्पक्ष जांच नहीं करवाता, तो कांग्रेस इस लड़ाई को राज्यव्यापी ‘सत्याग्रह’ के रूप में आगे बढ़ाएगी। उनका संदेश स्पष्ट है: “वोट चोरी नहीं चलेगी, और लोकतंत्र पर डाका डालने की कोई भी कोशिश नाकाम की जाएगी।”

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