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‘पुतिन की युद्ध मशीन को फंड’: रूस से तेल खरीद पर अमेरिका का भारत पर फिर निशाना, मोदी-ट्रंप नज़दीकियों के बावजूद तनाव

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वॉशिंगटन/नई दिल्ली, 13 सितंबर 2025

अमेरिका ने एक बार फिर भारत की रूस से तेल खरीद को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने कहा है कि भारत और चीन द्वारा बड़ी मात्रा में रूसी कच्चा तेल खरीदने से रूस की आय बढ़ रही है, जो सीधे-सीधे यूक्रेन युद्ध को फंड कर रही है। अमेरिका ने G7 और यूरोपीय संघ से अपील की है कि वे भारत और चीन पर 50% तक टैरिफ लगाकर रूस को आर्थिक दबाव में लाएं।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि भारत की भूमिका “रणनीतिक ऊर्जा खरीद” के बजाय रूस के लिए आर्थिक सहारा बन चुकी है। इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नज़दीकियों के बावजूद व्हाइट हाउस ने साफ संकेत दिया है कि जब तक भारत रूस से तेल आयात जारी रखेगा, तब तक व्यापार समझौते में बाधा बनी रहेगी।

भारत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसकी प्राथमिकता ऊर्जा सुरक्षा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दोहराया कि रूस से तेल खरीद भारत के लिए सस्ता और सुरक्षित विकल्प है, और अमेरिका की आपत्तियों के बावजूद यह प्रक्रिया जारी रहेगी। अगस्त 2025 में भारत का रूस से आयात करीब 2.9 बिलियन यूरो तक पहुंच गया, जो चीन के स्तर के लगभग बराबर है।

अमेरिका का कहना है कि भारत ने रूस से तेल खरीदकर भले ही 17 बिलियन डॉलर बचाए हों, लेकिन ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ के चलते भारत के निर्यात को लगभग 37 बिलियन डॉलर का नुकसान उठाना पड़ सकता है। विश्लेषकों के मुताबिक यह स्थिति भारत के लिए संतुलन साधने की चुनौती बन गई है।

इस बीच, ट्रंप प्रशासन ने भारत पर पहले ही 50% तक टैरिफ लागू कर दिए हैं, जिनमें से 25% रूस से तेल आयात पर केंद्रित हैं। नई दिल्ली और वाशिंगटन दोनों व्यापार समझौते की दिशा में बातचीत कर रहे हैं, लेकिन ऊर्जा का यह विवाद रिश्तों में खटास का कारण बना हुआ है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि मोदी-ट्रंप की व्यक्तिगत केमिस्ट्री रिश्तों को बनाए रखने में मदद कर सकती है, लेकिन रूस से तेल खरीद का मुद्दा दोनों देशों के बीच बड़ी कूटनीतिक चुनौती बन चुका है।

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