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भारत बना ग्लोबल कंपनियों का नया ठिकाना: PM मोदी से मिले Kyndryl के CEO, निवेश के लिए चीन छोड़ भारत पर दांव

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भारत अब केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाज़ार नहीं बल्कि ग्लोबल इनोवेशन और निवेश का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। दुनिया की दिग्गज कंपनियाँ, जो कभी चीन को उत्पादन और तकनीकी नवाचार का अड्डा मानती थीं, अब भारत की ओर तेज़ी से रुख कर रही हैं। इसी सिलसिले में आज किंड्रिल (Kyndryl) के चेयरमैन और सीईओ मार्टिन श्रोटर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में मुलाकात की।
बैठक में भारत की अपार संभावनाओं, युवा प्रतिभा और तकनीकी क्षेत्र की तेजी से बढ़ती ताकत पर विस्तृत चर्चा हुई। पीएम मोदी ने श्रोटर का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए कहा कि भारत सिर्फ एक “मार्केट” नहीं, बल्कि भविष्य की ग्लोबल ग्रोथ का “पार्टनर” है। उन्होंने कहा—“भारत की धरती पर वैश्विक साझेदारों के लिए अनंत अवसर हैं। हमारी युवा शक्ति और नवाचार क्षमता दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों का समाधान गढ़ सकती है।”
मार्टिन श्रोटर ने भी भारत की प्रगति को सराहते हुए कहा कि किंड्रिल भारत को डिजिटल इनोवेशन का हब बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने माना कि भारत में मौजूद प्रतिभा और स्थिर कारोबारी माहौल इसे वैश्विक निवेशकों के लिए सबसे विश्वसनीय ठिकाना बना रहा है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मुलाकात सिर्फ भारत-किंड्रिल साझेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस बड़े बदलाव का संकेत है, जिसमें बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अब चीन से हटकर भारत पर दांव लगा रही हैं। अमेरिका और यूरोप की कई कंपनियाँ पहले ही “चाइना-प्लस-वन” रणनीति अपनाकर भारत में निवेश बढ़ा रही हैं। भारत की राजनीतिक स्थिरता, लोकतांत्रिक व्यवस्था और लगातार सुधरते कारोबारी माहौल ने इसे चीन के मुकाबले कहीं अधिक भरोसेमंद विकल्प बना दिया है।

भारत का बढ़ता मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम और मजबूत सप्लाई चेन अब दुनिया भर के निवेशकों को यह भरोसा दिला रहा है कि भारत उनके लिए एक स्थायी और सुरक्षित ठिकाना है। कोविड-19 महामारी और चीन पर बढ़ते भू-राजनीतिक अविश्वास ने वैश्विक कंपनियों को भारत की ओर आकर्षित किया है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘पीएलआई स्कीम’ जैसी नीतियों ने भारत को एक ऐसा प्लेटफॉर्म प्रदान किया है, जहां उच्च गुणवत्ता वाली मैन्युफैक्चरिंग और विश्वसनीय सप्लाई चेन का निर्माण तेजी से हो रहा है। यही कारण है कि भारत अब वैश्विक निवेशकों के लिए “ग्लोबल रिस्क-फ्री पार्टनर” के रूप में उभर रहा है।

स्टार्टअप इकोसिस्टम में भारत ने पिछले एक दशक में जिस तेज़ी से छलांग लगाई है, वह इसे ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए सबसे आकर्षक डेस्टिनेशन बना रही है। यह साफ है—अब दुनिया भारत को सिर्फ “आउटसोर्सिंग हब” नहीं बल्कि “इनोवेशन हब” के रूप में देख रही है।

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