अलास्का/नई दिल्ली, 16 अगस्त 2025 — अलास्का में आयोजित शिखर वार्ता के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और भारत को लेकर चौंकाने वाला बयान दिया। ट्रंप ने कहा कि “रूस ने अपना सबसे बड़ा तेल ग्राहक खो दिया है, और यह भारत है।” पुतिन के साथ करीब तीन घंटे चली बैठक किसी ठोस समझौते के बिना समाप्त हो गई।
ट्रंप ने पुतिन के साथ यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक आर्थिक संकट पर चर्चा की, लेकिन दोनों नेताओं के बीच मतभेद बने रहे। बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने संकेत दिया कि अगर रूस आक्रामक रुख जारी रखता है, तो अमेरिका उसके ऊर्जा निर्यात पर और कड़े प्रतिबंध लगा सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत जैसे देशों को वैकल्पिक ऊर्जा आपूर्ति में सहयोग देने के लिए तैयार है।
भारत पर असर
भारत रूस से कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है, खासकर यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस पर पाबंदियां लगाईं। हालांकि, हाल के महीनों में रूसी सप्लाई में रुकावट और पश्चिमी दबाव के चलते भारत ने अन्य स्रोतों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। ट्रंप के इस बयान से यह संकेत मिलता है कि रूस और भारत के बीच तेल व्यापार में दरार गहरी हो सकती है।
अगर ट्रंप दोबारा सत्ता में आते हैं और रूस पर टैरिफ या नए प्रतिबंध लागू करते हैं, तो भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति और सप्लाई चेन में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं। इससे घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
रूस की मुश्किलें और भारत की कूटनीति
रूस के लिए भारत एक भरोसेमंद और बड़ा ऊर्जा ग्राहक रहा है। यदि यह साझेदारी कमजोर होती है, तो रूस को एशिया और अफ्रीका में नए खरीदार तलाशने होंगे। दूसरी तरफ भारत को भी संतुलन साधना होगा—एक ओर रूस के साथ दशकों पुराने संबंध, और दूसरी ओर अमेरिका-यूरोप की साझेदारी।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को आने वाले महीनों में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर तेज़ी से कूटनीतिक कदम उठाने होंगे। वहीं रूस पर पश्चिमी टैरिफ या ट्रंप की संभावित नीतियों का असर भारत की विदेश नीति और आर्थिक स्थिति पर गहरा पड़ सकता है।




