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बॉडी पॉजिटिविटी मूवमेंट ने बदली सौंदर्य की परिभाषा: अब आत्मस्वीकृति है असली खूबसूरती

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कोलकाता, पश्चिम बंगाल

4 अगस्त 2025

सदियों से सौंदर्य का मापदंड पतला, गोरा और ‘परफेक्ट’ शरीर माना जाता रहा है — लेकिन अब भारत में बॉडी पॉजिटिविटी मूवमेंट उस सोच को चुनौती दे रहा है। खासकर कोलकाता, मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों में युवा अब सोशल मीडिया और फैशन के माध्यम से यह संदेश दे रहे हैं कि हर शरीर सुंदर है।

2025 में यह आंदोलन अब एक इंटरनेट ट्रेंड से आगे बढ़कर एक सांस्कृतिक बदलाव बन चुका है। महिलाएं और पुरुष दोनों ही अब अपने स्किन टोन, बॉडी शेप, एक्ने, स्ट्रेच मार्क्स और वजन को बिना शर्म के स्वीकार कर रहे हैं — और गर्व के साथ अपने अनुभव साझा कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर #BodyPositivity, #LoveYourself, #MyBodyMyRules जैसे हैशटैग अब लाखों लोगों की आवाज़ बन चुके हैं। इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर अब ऐसे कंटेंट क्रिएटर्स उभरकर आए हैं जो बिना फिल्टर, बिना एडिटिंग अपने शरीर और जीवन की सच्चाई को दिखाते हैं।

फैशन ब्रांड्स भी अब बदल रहे हैं — प्लस-साइज़ मॉडल्स, डार्क स्किन टोन वाले फेस मॉडल्स और ट्रांसजेंडर चेहरों को भी अब रैंप और विज्ञापनों में जगह मिल रही है। कई मशहूर डिजाइनर अब “इनक्लूसिव फैशन” की बात कर रहे हैं, जिसमें हर उम्र, रंग, लिंग और आकार को महत्व दिया जा रहा है।

इस आंदोलन का सकारात्मक असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ा है। अब युवा पहले की तुलना में कई गुना कम आत्मग्लानि और अवसाद का अनुभव करते हैं, क्योंकि वे दूसरों से तुलना करने की जगह अपने शरीर को अपनाना सीख रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव न सिर्फ व्यक्तिगत आत्मसम्मान को बढ़ाता है, बल्कि समाज को अधिक करुणामय और विविधता को अपनाने वाला बनाता है।

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