राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 24 अगस्त 2026
एमनेस्टी की रिपोर्ट में पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल
दिल्ली में परीक्षा irregularities और NEET पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर एक नई रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने सोमवार को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली और बिहार में हुए युवा नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने पैलेट गन, आंसू गैस लॉन्चर, ग्रेनेड, लाठियों और इलेक्ट्रिक शॉक उपकरणों का इस्तेमाल किया। इन प्रदर्शनों का राजनीतिक असर भी काफी बड़ा रहा और आंदोलन के बीच तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।
पुलिस के दावे से अलग है एमनेस्टी की रिपोर्ट
एमनेस्टी की रिपोर्ट पुलिस के उस पक्ष से अलग तस्वीर पेश करती है, जिसमें कहा गया था कि प्रदर्शनकारियों के हिंसक होने के बाद ही बल प्रयोग किया गया। मानवाधिकार संगठन का कहना है कि उसने गवाहों के बयानों और सत्यापित दृश्य साक्ष्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में पुलिस की कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किए गए कुछ साधन गंभीर चोट और मानवाधिकारों से जुड़े सवाल खड़े करते हैं। खास तौर पर पैलेट फायरिंग और इलेक्ट्रिक शॉक उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर रिपोर्ट ने चिंता जताई है।
पैलेट गन और इलेक्ट्रिक शॉक डिवाइस के इस्तेमाल का सवाल
एमनेस्टी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इस्तेमाल किए गए साधनों में पैलेट फायरिंग शॉटगन, आंसू गैस लॉन्चर, ग्रेनेड, बैटन और इलेक्ट्रिक शॉक डिवाइस शामिल थे। संगठन ने गवाहों के बयानों के साथ ऐसे दृश्य साक्ष्यों का भी हवाला दिया है, जिन्हें उसने सत्यापित किया है। यदि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच में भी पुष्टि होती है, तो यह सवाल गंभीर हो जाता है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग की सीमा और अनुपात का कितना पालन किया।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही गठित कर दी है जांच समिति
इस पूरे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट भी मामले की स्वतंत्र जांच के लिए कदम उठा चुका है। 20 अगस्त को शीर्ष अदालत ने दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसा की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति का उद्देश्य केवल पुलिस पर लगे आरोपों की जांच करना नहीं है, बल्कि प्रदर्शनकारियों की ओर से हुई हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों को भी देखना है। यानी अब इस पूरे घटनाक्रम की जांच एक स्वतंत्र प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी।
शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक से शुरू हुआ था आंदोलन
इन प्रदर्शनों की शुरुआत परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और NEET पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर छात्रों की नाराजगी से हुई थी। छात्रों और युवाओं ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। दिल्ली के जंतर-मंतर समेत कई स्थानों पर आंदोलन हुआ। प्रदर्शन बढ़ने के साथ यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा बन गया और आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक मामला पहुंचा।
अब पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच पर नजर
एमनेस्टी की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित जांच समिति ने दिल्ली के छात्र आंदोलन में पुलिस कार्रवाई को लेकर बहस को और गंभीर बना दिया है। एक तरफ कानून-व्यवस्था बनाए रखने और हिंसक स्थिति को नियंत्रित करने की पुलिस की जिम्मेदारी है, तो दूसरी तरफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग वास्तव में कितना जरूरी था, क्या वह अनुपातिक था और क्या पुलिस ने तय नियमों का पालन किया। सुप्रीम कोर्ट की समिति की जांच से इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।




