राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 24 अगस्त 2026
कॉकroach Janta Party (CJP) के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद मार्च के दौरान पेलेट फायरिंग में घायल हुए दो प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। दिपके ने पुलिस और सरकार से सवाल किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पेलेट फायरिंग क्यों की गई और इसके लिए जवाबदेही कब तय होगी।
दिपके ने सोमवार को सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने साहिल और विकास से बात की, जिन्हें 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन से चोटें लगी थीं। उन्होंने कहा कि पुलिस और सरकार की ओर से कार्रवाई को लेकर सफाई दी जा रही है, लेकिन घायलों की चोटें और पुलिस रिकॉर्ड कई गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
साहिल की एक आंख की रोशनी चली गई
दिपके के अनुसार, साहिल ने 2025 में दिल्ली पुलिस की परीक्षा दी थी। वह राजनीतिक विज्ञान का छात्र है और अपने परिवार की आर्थिक मदद के लिए पार्ट-टाइम काम करता था। उसके पिता दिव्यांग हैं और परिवार में पांच सदस्य हैं।
दिपके ने बताया कि साहिल की आंख में अभी भी पेलेट फंसे हुए हैं और एक आंख की रोशनी चली गई है। चोटों के कारण वह काम करने की स्थिति में भी नहीं है।
दिपके ने सवाल किया कि यदि पुलिस कार्रवाई को हिंसा नहीं माना जा रहा है, तो साहिल की गंभीर चोटों की जिम्मेदारी कौन लेगा।
चार लोगों को पेलेट से चोटें
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 20 जुलाई की घटना में कम से कम चार लोगों को पेलेट जैसी चोटें आईं। इनमें दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र साहिल लोचब, निजी कंपनी में काम करने वाले शेख इरशाद मंसूरी, बिहार के प्रशांत और एक पत्रकार शामिल हैं।
प्रशांत के अस्पताल के डिस्चार्ज दस्तावेज में दाहिने हाथ, सीने और जांघ के पास पेलेट इंजरी दर्ज होने की बात रिपोर्ट में सामने आई है।
प्रशांत के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को हटाने के दौरान आंसू गैस और लाठीचार्ज के बाद वह आगे बढ़े, जहां पुलिस कार्रवाई के दौरान उन्हें शरीर के अलग-अलग हिस्सों में पेलेट लगे।
पुलिस रिकॉर्ड में पेलेट इस्तेमाल दर्ज
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू दिल्ली पुलिस की जनरल डायरी में दर्ज रिकॉर्ड है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 20 जुलाई की कार्रवाई के संबंध में दर्ज पुलिस रिकॉर्ड में एंटी-रायट गन और प्लास्टिक पेलेट सहित विभिन्न उपकरणों के इस्तेमाल का उल्लेख है।
रिकॉर्ड में पेलेट के इस्तेमाल और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश का उल्लेख होने से यह स्पष्ट है कि प्रदर्शन के दौरान पेलेट का इस्तेमाल हुआ था।
साहिल की शिकायत पर FIR
पेलेट से घायल हुए साहिल की शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी साहिल के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचे थे और कई घंटे तक वहां विरोध जताया था।
FIR दर्ज होने के बाद घटना की जांच का दायरा और बढ़ गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने गठित की पांच सदस्यीय समिति
20 जुलाई के प्रदर्शन में पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पांच सदस्यीय स्वतंत्र जांच समिति गठित की है। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं।
समिति को पेलेट गन के इस्तेमाल, पुलिस बल प्रयोग की आवश्यकता और अनुपातिकता, कानून-व्यवस्था के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली, निषेधाज्ञा, पुलिस निगरानी और असहमति के अधिकार से जुड़े सवालों की जांच करनी है।
समिति में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रवि शंकर झा, न्यायमूर्ति शालिंदर कौर, पूर्व CBI निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व DGP एल.आर. बिश्नोई भी शामिल हैं।
अब जवाबदेही का सवाल
20 जुलाई की घटना में पेलेट गन का इस्तेमाल पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज है और कई घायलों के मेडिकल दस्तावेज सामने आ चुके हैं। ऐसे में अब मुख्य सवाल यह है कि छात्र प्रदर्शनकारियों पर पेलेट फायरिंग का आदेश क्यों दिया गया और क्या बल प्रयोग कानून तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप था।
सुप्रीम कोर्ट की स्वतंत्र जांच समिति अब पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। उसकी रिपोर्ट यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि कार्रवाई में नियमों का पालन हुआ या पुलिस बल का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा किया गया।
CJP संयोजक अभिजीत दिपके ने इसी जवाबदेही की मांग करते हुए सवाल उठाया है—जब पेलेट इस्तेमाल का पुलिस रिकॉर्ड मौजूद है और घायल छात्रों के मेडिकल दस्तावेज सामने हैं, तो अब जिम्मेदारी तय करने में देरी क्यों?




