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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया यूपी के पहले आयुष विश्वविद्यालय का उद्घाटन, कहा – “यह भारत की पारंपरिक चिकित्सा शक्ति का नया अध्याय है”

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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद के भटहट क्षेत्र में स्थित महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय का भव्य उद्घाटन भारत की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने किया। अपने दो दिवसीय पूर्वांचल दौरे के दूसरे दिन राष्ट्रपति ने प्रदेश को यह बहुप्रतीक्षित सौगात दी, जो केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, बल्कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के पुनरुत्थान और ग्रामीणआधारित रोजगार के नए द्वार खोलने का भी संकल्प है। उद्घाटन अवसर पर राष्ट्रपति ने आयुष चिकित्सा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कियह विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और चिकित्सीय परंपराओं को विश्व स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाने का माध्यम बनेगा। आयुष केवल उपचार नहीं, जीवन का संतुलित मार्ग है। 

यह वही आयुष विश्वविद्यालय है जिसका शिलान्यास 28 अगस्त 2021 को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने किया था। यह विश्वविद्यालय भटहट क्षेत्र के पिपरी गांव में 52 एकड़ भूमि पर विस्तारित है, जिसकी स्वीकृत लागत ₹267.50 करोड़ है। उत्तर प्रदेश सरकार के आत्मनिर्भर स्वास्थ्य क्षेत्रविजन के अनुरूप, यह विश्वविद्यालय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिसका उद्देश्य केवल चिकित्सकीय सेवा ही नहीं, बल्कि आयुष शिक्षा, अनुसंधान, पंचकर्म चिकित्सा, प्राकृतिक चिकित्सा और हेल्थ टूरिज़्म को संस्थागत रूप देना है। उद्घाटन के अवसर पर राष्ट्रपति ने डॉक्टरों, वैद्यों, विद्यार्थियों और ग्रामीण जनों से संवाद भी किया और विश्वविद्यालय कोभारत की प्राचीन चेतना और आधुनिक नवाचार का संगमबताया। 

यहां यह उल्लेखनीय है कि आयुष ओपीडी की शुरुआत 15 फरवरी 2023 को खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा की जा चुकी थी। ओपीडी के तहत अब तक सवा लाख से अधिक मरीज आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा पद्धतियों से लाभान्वित हो चुके हैं। हर दिन औसतन 300 मरीज ओपीडी में परामर्श ले रहे हैं, और अब इसके साथ आईपीडी और ऑपरेशन थिएटर (ओटी) के शुरू होने से यहां आयुष आधारित पूर्ण उपचार की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। इस विश्वविद्यालय में 28 कॉटेज वाला उन्नत पंचकर्म केंद्र भी बनकर तैयार है, जो जल्द ही मरीजों के लिए खोल दिया जाएगा। 

आयुष विश्वविद्यालय का महत्व केवल स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित नहीं है। इसके उद्घाटन से पूर्वांचल के विकास को नई दिशा मिल रही है। आयुष हेल्थ टूरिज्म, औषधीय खेती, ग्राम आधारित जड़ीबूटी उत्पादन, और पारंपरिक चिकित्सा शिक्षा के जरिए यह संस्थान कृषकों, नौजवानों, और स्थानीय समुदाय के लिए रोज़गार और उद्यमिता के व्यापक अवसरों का वाहक बनेगा। इसके आसपास के गांवों को औषधीय पादपों की खेती के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे किसान पारंपरिक खेती की तुलना में अधिक आय अर्जित कर सकेंगे। 

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने उद्घाटन भाषण में यह भी कहा किभारत आज जिस आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है, उसमें हमारी परंपराएं हमारी शक्ति हैं। आयुष पद्धति केवल रोग से मुक्ति नहीं देती, बल्कि जीवनशैली को संतुलित करने का दर्शन देती है।उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्वास्थ्य क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की भी सराहना की और आयुष मंत्रालय के प्रयासों को सराहनीय बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि गोरखपुर जैसे स्थान पर, जहां शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और आध्यात्मिक परंपराओं का संगम है, वहां इस प्रकार का आयुष विश्वविद्यालय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहचान को और सशक्त करेगा। 

महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना से पहले उत्तर प्रदेश में आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी और योगप्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों के नियमन के लिए अलगअलग संस्थाएं काम कर रही थीं। लेकिन अब यह विश्वविद्यालय प्रदेश के 98 से अधिक राजकीय एवं निजी आयुष कॉलेजों का एकीकृत नियामक संस्थान बन गया है। यह केवल शैक्षिक मानकों को सुनिश्चित करेगा, बल्कि आयुष चिकित्सा शिक्षा में शोध, नवाचार और गुणवत्ता सुधार का भी नेतृत्व करेगा। 

गौरतलब है कि इस विश्वविद्यालय के खुलने के साथ गोरखपुर देश के गिनेचुने चार विश्वविद्यालयों वाले जिलों में शामिल हो गया है। यहां पहले से दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, और महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि गोरखपुर में जल्द ही पंचम विश्वविद्यालय फॉरेस्ट्री यूनिवर्सिटी की भी स्थापना होगी, जिसके लिए ज़मीन चिन्हित की जा चुकी है। 

1 जुलाई 2025 को राष्ट्रपति द्वारा महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय का उद्घाटन केवल एक भव्य शिल्प और शिक्षण संस्थान का शुभारंभ है, बल्कि यह आधुनिक भारत में परंपरा, विज्ञान और लोककल्याण के समन्वय की ओर बढ़ाया गया एक सशक्त कदम है। यह दिन उत्तर प्रदेश के चिकित्सा इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। 

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