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स्टेटहुड नहीं तो कैबिनेट नहीं: कांग्रेस ने फिर उठाई जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य बनाने की मांग

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जम्मू-कश्मीर में गठबंधन सरकार बनने के बाद कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक राज्य को पूर्ण राज्य का दर्जा (स्टेटहुड) वापस नहीं दिया जाता, वह सरकार की कैबिनेट में शामिल नहीं होगी। पार्टी का कहना है कि यह केवल सत्ता की साझेदारी का सवाल नहीं, बल्कि लोकतंत्र और जनता से किए गए वादों की बहाली का मामला है।

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस मुद्दे पर तीखा बयान देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में हालात बेहद गंभीर हैं। “यहाँ चुने गए मुख्यमंत्री को भी पुलिस रोक देती है, और सरकार की कोई भी फाइल उपराज्यपाल (LG) की मंजूरी के बिना आगे नहीं बढ़ सकती। क्या यही लोकतंत्र है?” उन्होंने सवाल उठाया। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि जनता से किए गए वादों को निभाने और लोकतंत्र को बहाल करने के लिए स्टेटहुड बहाल किया जाना बेहद ज़रूरी है।

वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, महासचिव और जम्मू-कश्मीर में पार्टी विधायक दल के नेता (CLP) गुलाम अहमद मीर ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने वादों को याद दिलाया। उन्होंने कहा, “जून 2021 में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि पहले Delimitation होगा, फिर चुनाव, और उसके बाद जम्मू-कश्मीर को स्टेटहुड वापस दिया जाएगा। हमने उस समय मांग की थी कि पहले चुनाव कराइए, स्टेटहुट दीजिए, फिर Delimitation कीजिए। लेकिन सरकार अड़ी रही।”

मीर ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद चुनाव कराए गए। चुनाव आयोग और सरकार ने हलफ़नामे में लिखा था कि चुनाव के बाद स्टेटहुड बहाल किया जाएगा। “अब चुनाव भी हो गए, मुख्यमंत्री और मंत्री परिषद बन चुकी है, और विधानसभा में प्रस्ताव भी पारित हो चुका है कि जम्मू-कश्मीर को स्टेटहुट वापस मिलना चाहिए। लेकिन 10 महीने बीत चुके हैं, सरकार अभी भी चुप है।”

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अगर केंद्र सरकार ने खुद जो कहा था, उसे ही नहीं मानेगी, तो जम्मू-कश्मीर की जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का क्या होगा? पार्टी का रुख साफ है – जब तक स्टेटहुड नहीं बहाल होगा, कांग्रेस न तो सत्ता में शामिल होगी, न ही संवैधानिक बहस से पीछे हटेगी।

अब सवाल यह है कि केंद्र सरकार अपनी घोषणा के अनुरूप कब और कैसे जम्मू-कश्मीर को उसका पूर्ण राज्य का दर्जा लौटाएगी। कांग्रेस का दावा है कि यह न सिर्फ राजनीतिक मांग है, बल्कि संविधान और संघीय ढांचे की रक्षा का मुद्दा है।

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