राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 7 अगस्त 2026
संसद के मानसून सत्र में 20 जुलाई को छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा लगातार सरकार का पीछा नहीं छोड़ रहा है। शुक्रवार को भी लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की गैरमौजूदगी को लेकर जोरदार हंगामा किया। विपक्ष का कहना है कि जब आरोप गृह मंत्रालय और पुलिस कार्रवाई पर हैं तो जवाब भी गृह मंत्री को ही देना होगा। लेकिन सरकार ने साफ कर दिया कि यह फैसला विपक्ष नहीं करेगा कि कौन मंत्री कब सदन में आएगा।
राज्यसभा में जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के सांसदों ने अमित शाह को सदन में बुलाने की मांग करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष का कहना था कि 20 जुलाई को छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर सरकार अब तक जवाब देने से बच रही है और संसद को लगातार टाल रही है। हंगामा बढ़ने पर सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। बाद में भी स्थिति सामान्य नहीं हुई और सदन की कार्यवाही प्रभावित रही।
सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने विपक्ष की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा, “विपक्ष यह तय नहीं कर सकता कि कौन-सा मंत्री कब सदन में आएगा।” रिजीजू ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह संसद परिसर में मौजूद रहते हैं, लेकिन किसी मंत्री की सदन में उपस्थिति कार्यसूची और सरकारी कामकाज के अनुसार तय होती है। उन्होंने यह भी कहा कि सभापति की ओर से गृह मंत्री को सदन में उपस्थित होने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है।
रिजीजू का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि एक दिन पहले राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने संसदीय कार्य मंत्री से विपक्ष की भावना गृह मंत्री तक पहुंचाने को कहा था। सभापति ने यह जरूर कहा था कि विपक्ष की मांग पर विचार किया जाए, लेकिन उन्होंने अमित शाह को सदन में आने का कोई औपचारिक निर्देश नहीं दिया था। शुक्रवार को सरकार ने इसी बात को आधार बनाते हुए विपक्ष की मांग को ठुकरा दिया।
विपक्ष का आरोप है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार आरोप लगा रहे हैं कि प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन, आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया गया। विपक्ष का कहना है कि इतने गंभीर आरोपों पर सरकार चुप नहीं रह सकती और गृह मंत्री को संसद में आकर पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत बयान देना चाहिए।
लोकसभा में कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव का नोटिस भी दिया। उन्होंने मांग की कि छात्रों के खिलाफ हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर तत्काल चर्चा कराई जाए और गृह मंत्री सदन को पूरे मामले की जानकारी दें। कांग्रेस का कहना है कि यह केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता का मामला है।
संसद के बाहर भी विपक्ष का विरोध जारी रहा। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद परिसर के मकर द्वार पर प्रदर्शन किया और गृह मंत्री से जवाब देने की मांग दोहराई। विपक्ष का कहना है कि जब तक अमित शाह सदन में आकर जवाब नहीं देंगे, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
इस बीच संसद का सामान्य विधायी कामकाज भी प्रभावित हुआ। सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाना चाहती है, लेकिन विपक्ष छात्रों के मुद्दे पर चर्चा और गृह मंत्री के बयान को प्राथमिकता देने पर अड़ा हुआ है। लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है।
अब यह टकराव केवल एक मंत्री की उपस्थिति का सवाल नहीं रह गया है। यह सरकार की जवाबदेही और संसद में विपक्ष की भूमिका को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुका है। एक तरफ विपक्ष का कहना है कि गृह मंत्रालय से जुड़े मामले में जवाब भी गृह मंत्री को देना चाहिए, वहीं सरकार संसदीय परंपराओं का हवाला देकर विपक्ष की मांग को अस्वीकार कर रही है।
फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। ऐसे में मानसून सत्र का गतिरोध टूटता नजर नहीं आ रहा। अब सबकी नजर इस पर है कि क्या सरकार आगे किसी समझौते का रास्ता निकालेगी या फिर छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा संसद में इसी तरह टकराव का कारण बना रहेगा।




