राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 20 जुलाई 2026
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का आमरण अनशन 21वें दिन भी जारी रहा। जंतर-मंतर से स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस द्वारा सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने के बाद भी उन्होंने अपना अनशन समाप्त नहीं किया। अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि वांगचुक में डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) और मेटाबॉलिक असंतुलन के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तथा उन्हें तत्काल चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता है। वहीं, वांगचुक और उनके समर्थकों का कहना है कि आंदोलन पहले की तरह जारी रहेगा और 20 जुलाई का ‘चलो संसद’ मार्च भी तय कार्यक्रम के अनुसार होगा।
सफदरजंग अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन में बताया गया कि वांगचुक ने अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी इंट्रावेनस (IV) फ्लूइड, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS) और अन्य दवाएं लेने से इनकार कर दिया। अस्पताल के अनुसार, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ ने भी उपचार कर रही मेडिकल टीम की राय से सहमति जताई है कि उनकी स्थिति को देखते हुए तत्काल तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट थेरेपी की जरूरत है, ताकि गंभीर जटिलताओं से बचा जा सके।
हालांकि अस्पताल ने यह भी स्पष्ट किया कि वांगचुक के परिवार की ओर से उपचार के लिए सहमति नहीं दी गई है। दूसरी ओर, एम्स के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. अक्षय कुमार, जिन्होंने उनकी जांच की, ने बताया कि वांगचुक पूरी तरह होश में हैं, उनकी ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन स्तर और नाड़ी सामान्य हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टर लगातार उन्हें उपचार स्वीकार करने के लिए समझाने की कोशिश कर रहे हैं।
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने अस्पताल प्रशासन पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया। उनका कहना है कि परिवार को मेडिकल रिपोर्ट समय पर उपलब्ध नहीं कराई जा रही है और दूसरी चिकित्सकीय राय लेने में भी कठिनाई आ रही है। उन्होंने मांग की कि वांगचुक को अस्पताल से छुट्टी देकर उनकी इच्छा के अनुसार आंदोलन स्थल पर लौटने दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सहमति के बिना वांगचुक को कोई दवा या उपचार नहीं दिया जाना चाहिए।
उधर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दावा किया कि वांगचुक अस्पताल में रहते हुए भी अपना अनशन जारी रखे हुए हैं। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि वांगचुक की स्पष्ट इच्छा है कि उन्हें वापस जंतर-मंतर जाने दिया जाए, ताकि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन जारी रख सकें। संगठन ने समर्थकों से अपील की कि वे आंदोलन को कमजोर न पड़ने दें और 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च में बड़ी संख्या में शामिल हों।
जंतर-मंतर पर भी आंदोलन जारी रहा। वांगचुक के अस्पताल ले जाए जाने के बाद बड़ी संख्या में लोग रातभर धरनास्थल पर जुटे रहे। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस रात में धरना स्थल खाली कराने की तैयारी कर रही है, जबकि पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए अतिरिक्त बल तैनात किया। संसद के मानसून सत्र और प्रस्तावित मार्च को देखते हुए नई दिल्ली जिले में कई स्थानों पर बैरिकेडिंग और सघन जांच की व्यवस्था की गई।
इस घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गईं। राहुल गांधी ने कहा कि शांतिपूर्ण भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाया जाना गलत है। अन्ना हजारे ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह वांगचुक की मांगों पर बातचीत करे और कहा कि सरकार को उनकी सहनशक्ति की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। पूर्व प्रधान न्यायाधीश के.जी. बालाकृष्णन ने भी कहा कि सबसे पहले वांगचुक का जीवन सुरक्षित रहना चाहिए।
वहीं, उद्धव ठाकरे, सचिन पायलट, पिनराई विजयन, हरियाणा कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए सरकार से संवाद की मांग की। दूसरी ओर, भाजपा ने सरकार के कदम का बचाव करते हुए कहा कि वांगचुक को स्वास्थ्य कारणों और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप अस्पताल ले जाया गया है। भाजपा का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता उनकी जान बचाना है, जबकि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रूप देने की कोशिश कर रहा है।
सोनम वांगचुक का आंदोलन अब केवल एक व्यक्ति के अनशन तक सीमित नहीं रह गया है। उनके समर्थन में देशभर में कई छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता भी आमरण अनशन पर बैठे हैं। आंदोलनकारी NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। इसी कारण यह मुद्दा संसद के मानसून सत्र से पहले राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख विषय बन चुका है। विपक्ष इसे संसद में उठाने की तैयारी कर चुका है, जबकि सरकार कानून-व्यवस्था और न्यायालय के निर्देशों के पालन की बात कह रही है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन और उससे जुड़ी राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।




