Home » International » सऊदी अरब में फंसे छात्र को राहत की उम्मीद, सुप्रीम कोर्ट ने CBSE से मांगा जवाब

सऊदी अरब में फंसे छात्र को राहत की उम्मीद, सुप्रीम कोर्ट ने CBSE से मांगा जवाब

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | रियाद/नई दिल्ली | 9 जून 2026

सुप्रीम कोर्ट ने सऊदी अरब में रहने वाले एक भारतीय छात्र के मामले में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से जवाब तलब किया है। छात्र का आरोप है कि 12वीं की सुधार (इम्प्रूवमेंट) परीक्षा का परिणाम अब तक घोषित नहीं किया गया है, जिससे उसकी उच्च शिक्षा और कॉलेज में प्रवेश की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।

मामला प्रणसू जिगरकुमार पटेल का है, जो सऊदी अरब के अल जुबैल स्थित इंटरनेशनल इंडियन स्कूल का छात्र रहा है। उसने वर्ष 2026 में फिजिक्स, केमिस्ट्री, गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर साइंस विषयों में सुधार परीक्षा के लिए आवेदन किया था। लेकिन मार्च 2026 में अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया के कई देशों में CBSE की कुछ परीक्षाएं रद्द कर दी गईं। इसके चलते वह केवल फिजिक्स और केमिस्ट्री की परीक्षा ही दे सका।

बाद में CBSE ने प्रभावित छात्रों के लिए एक विशेष मूल्यांकन योजना जारी की। इस योजना के तहत जिन विषयों की परीक्षा नहीं हो सकी, उनके अंक स्कूल के शैक्षणिक रिकॉर्ड, त्रैमासिक परीक्षा, अर्धवार्षिक परीक्षा और प्री-बोर्ड के अंकों के आधार पर निर्धारित किए जाने थे। इसी व्यवस्था के तहत अधिकांश प्रभावित छात्रों के परिणाम 13 मई को घोषित कर दिए गए।

हालांकि प्रणसू पटेल का आरोप है कि उसका परिणाम अब तक जारी नहीं किया गया है। CBSE की वेबसाइट पर उसकी स्थिति “RL” यानी “रिजल्ट लेटर” दिखाई जा रही है। छात्र का कहना है कि उसके स्कूल के सभी शैक्षणिक रिकॉर्ड उपलब्ध हैं और उन्हें आधार बनाकर उसका परिणाम भी घोषित किया जा सकता है।

ALSO READ  SCO में भारत ने अमेरिका-इजरायल के खिलाफ खुलकर लिया रुख, ईरान पर हमले के लिए SCO ने लगाई फटकार, दिल्‍ली का मौन समर्थन

मामले की सुनवाई के दौरान CBSE की ओर से पेश वकील ने अदालत से कुछ समय देने का अनुरोध करते हुए कहा कि बोर्ड इस समय अत्यधिक कार्यभार के दबाव में है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह एक छात्र के भविष्य और करियर का मामला है। अदालत ने कहा कि यदि परिणाम घोषित करने में और देरी हुई तो छात्र कई शिक्षण संस्थानों में प्रवेश का अवसर खो सकता है। कोर्ट ने टिप्पणी की, “जरूरत पड़े तो रात भर काम कीजिए, लेकिन बच्चे के भविष्य को खतरे में नहीं डाला जा सकता।”

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने CBSE को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 12 जून को निर्धारित की है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि छात्र के पूर्व शैक्षणिक रिकॉर्ड को आधार बनाकर उसके परिणाम पर विचार किया जा सकता है।

अपनी याचिका में छात्र ने कहा है कि परीक्षा का रद्द होना उसके नियंत्रण से बाहर की परिस्थिति थी और ऐसे में परिणाम रोकना उसके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसके साथ अन्य प्रभावित छात्रों की तुलना में अलग व्यवहार किया जा रहा है, जबकि उसकी स्थिति भी समान है।

अब इस मामले पर देश और विदेश में पढ़ रहे हजारों भारतीय छात्रों की नजरें टिकी हुई हैं। 12 जून को होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह तय कर सकता है कि छात्र का परिणाम कब और किस आधार पर घोषित किया जाए, ताकि उसकी उच्च शिक्षा और भविष्य प्रभावित न हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *