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ईरान की कड़ी चेतावनी: लेबनान पर हमले बढ़े तो अमेरिकी ठिकाने भी बनेंगे निशाना

अंतरराष्ट्रीय/ पश्चिम एशिया | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान | 8 जून 2026

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। ईरान ने अमेरिका और इज़राइल को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि लेबनान में सैन्य कार्रवाई और तेज की गई तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने और इज़राइली हित वैध लक्ष्य माने जाएंगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम को स्थायी शांति समझौते में बदलने के प्रयास लगातार विफल हो रहे हैं और इज़राइल-हिज़्बुल्लाह मोर्चे पर तनाव नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

ईरान की संसद के अध्यक्ष और शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बाकिर क़ालिबाफ ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखना और लेबनान में इज़राइल को सैन्य कार्रवाई की खुली छूट देना क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इज़राइल न तो संघर्षविराम के प्रति ईमानदार हैं और न ही सार्थक संवाद में विश्वास रखते हैं। उनके अनुसार दोनों देश केवल शक्ति की भाषा समझते हैं, जिसके कारण पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और टकराव लगातार बढ़ रहा है।

तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर उड़ रहे दो ईरानी हमलावर ड्रोन मार गिराए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार ये ड्रोन अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात के लिए खतरा बन रहे थे। अमेरिका ने कहा कि उसकी सेनाएं क्षेत्र में किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। दूसरी ओर ईरान ने इन कार्रवाइयों को उकसावे की राजनीति करार देते हुए अमेरिका पर क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया है।

इसी बीच पाकिस्तान ने एक बार फिर मध्यस्थ की भूमिका निभाने का प्रयास किया है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी तेहरान पहुंचे, जहां उन्होंने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का एक विशेष संदेश ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई तक पहुंचाया। माना जा रहा है कि पाकिस्तान दोनों देशों के बीच संवाद बहाल कर युद्ध को व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष में बदलने से रोकने की कोशिश कर रहा है। हाल के सप्ताहों में नकवी की यह तीसरी तेहरान यात्रा है, जो इस संकट को लेकर पाकिस्तान की बढ़ती चिंता को दर्शाती है।

उधर लेबनान मोर्चे पर भी हालात तेजी से बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। हिज़्बुल्लाह ने पुष्टि की है कि उसने उत्तरी इज़राइल में एक सैन्य ठिकाने पर ड्रोन हमला किया। संगठन का कहना है कि यह कार्रवाई दक्षिणी लेबनान में इज़राइली हमलों के जवाब में की गई है। इससे पहले इज़राइली सेना ने दावा किया था कि उसने लेबनान से दागे गए दो प्रोजेक्टाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। इसके बाद इज़राइल ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में नए हवाई हमले किए। संघर्षविराम लागू होने के बावजूद दोनों पक्षों के बीच लगातार हो रहे हमलों ने व्यापक युद्ध की आशंकाओं को और मजबूत कर दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी स्पष्ट कर दिया है कि जब तक कोई अंतिम शांति समझौता नहीं हो जाता, तब तक ईरान की जमी हुई संपत्तियां जारी नहीं की जाएंगी और न ही प्रतिबंधों में कोई राहत दी जाएगी। ट्रंप ने कहा कि समझौते के बाद ही आर्थिक रियायतों पर विचार किया जाएगा। तेहरान ने इस बयान को दबाव की राजनीति बताते हुए खारिज कर दिया है।

पश्चिम एशिया का यह संकट अब वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते तनाव के कारण तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। दुनिया के ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है, जिसका असर विश्व अर्थव्यवस्था पर व्यापक रूप से पड़ेगा।

इस बीच फीफा विश्व कप 2026 में भाग लेने जा रही ईरानी फुटबॉल टीम भी अमेरिका-ईरान विवाद के केंद्र में आ गई है। अमेरिकी प्रशासन ने खिलाड़ियों और आवश्यक स्टाफ को वीजा जारी कर दिया है, लेकिन कुछ अधिकारियों और सहयोगी स्टाफ को अनुमति नहीं मिलने पर तेहरान ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ईरान ने इसे खेलों में राजनीतिक हस्तक्षेप बताते हुए फीफा से भी हस्तक्षेप की मांग की है।

कुल मिलाकर पश्चिम एशिया की स्थिति अत्यंत संवेदनशील और विस्फोटक बनी हुई है। अमेरिका, ईरान, इज़राइल, लेबनान और खाड़ी देशों के बीच बढ़ता तनाव किसी भी समय बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है। कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन फिलहाल जमीनी हालात शांति की अपेक्षा टकराव और अनिश्चितता की दिशा में बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।

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