धर्म / तमिलनाडु | विशेष संवाददाता | ABC NATIONAL NEWS | चेन्नई | 29 मई 2026
तमिलनाडु सरकार ने मंदिर निधियों की सुरक्षा का दिया भरोसा, TANGEDCO को मिलने वाली वित्तीय सहायता पर उठे सवालों का भी दिया जवाब
तमिलनाडु सरकार ने राज्य के मंदिरों की जमा निधियों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए शुक्रवार को संप्रभु गारंटी (Sovereign Guarantee) देने की घोषणा की है। यह गारंटी उन मंदिर निधियों पर लागू होगी जो तमिलनाडु पावर फाइनेंस एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (TNPFIC) में जमा कराई गई हैं। राज्य सरकार का कहना है कि मंदिरों द्वारा जमा की गई राशि पूरी तरह सुरक्षित है और परिपक्वता अवधि पूरी होने पर मूलधन तथा ब्याज सहित भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।
मंदिर निधियों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी थी चिंता
पिछले कुछ समय से यह मुद्दा चर्चा में था कि राज्य के विभिन्न मंदिरों की निधियां TNPFIC में निवेश की गई हैं, जबकि यह सरकारी गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्था (NBFC) मुख्य रूप से तमिलनाडु पावर जेनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन (TANGEDCO) को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है। चूंकि TANGEDCO लंबे समय से वित्तीय चुनौतियों का सामना करता रहा है, इसलिए कई धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं ने मंदिरों की धनराशि की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की थी।
इन आशंकाओं के बीच तमिलनाडु सरकार ने मद्रास उच्च न्यायालय में एक ज्ञापन दायर कर स्पष्ट किया कि मंदिरों की जमा राशि पूरी तरह सुरक्षित है और सरकार स्वयं इसकी गारंटी देती है। सरकार ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में मंदिरों के धन की सुरक्षा और समय पर वापसी सुनिश्चित की जाएगी।
सरकार ने TANGEDCO के रिकॉर्ड का दिया हवाला
हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग (HR&CE) के सचिव जे. कुमारगुरुबरण द्वारा न्यायालय में दायर ज्ञापन में कहा गया कि TANGEDCO ने अपने वित्तीय दायित्वों के निर्वहन में लगातार विश्वसनीयता दिखाई है। सरकार के अनुसार, बिजली निगम ने समय पर भुगतान करने का एक मजबूत रिकॉर्ड स्थापित किया है और इसी आधार पर मंदिर निधियों के निवेश को सुरक्षित माना गया है।
सरकार ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में किसी प्रकार की वित्तीय चुनौती उत्पन्न होती है, तब भी राज्य सरकार स्वयं मंदिरों की जमा राशि की वापसी सुनिश्चित करेगी। इस आश्वासन को ही संप्रभु गारंटी का स्वरूप दिया गया है।
आस्था और वित्तीय प्रबंधन के बीच संतुलन
तमिलनाडु में हजारों मंदिरों के पास बड़ी मात्रा में जमा धनराशि उपलब्ध है। राज्य सरकार का तर्क है कि इस राशि को निष्क्रिय रखने के बजाय सुरक्षित निवेश के माध्यम से अधिक आय अर्जित की जा सकती है, जिससे मंदिरों के विकास, रखरखाव और धार्मिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।
हालांकि आलोचकों का कहना है कि मंदिरों की निधियों का उपयोग केवल धार्मिक और सामाजिक उद्देश्यों के लिए होना चाहिए तथा उन्हें सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के वित्तपोषण से जोड़ना उचित नहीं है। इसी कारण यह मुद्दा समय-समय पर राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बनता रहा है।
न्यायालय की निगरानी में आगे बढ़ेगा मामला
मद्रास उच्च न्यायालय में चल रही सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने यह स्पष्ट आश्वासन दिया है कि मंदिरों की जमा राशि किसी भी प्रकार के जोखिम में नहीं है। न्यायालय अब सरकार द्वारा दिए गए इस आश्वासन और गारंटी की शर्तों का परीक्षण करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार अपने वादे के अनुसार मंदिर निधियों की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करती है, तो यह मॉडल अन्य धार्मिक संस्थानों के वित्तीय प्रबंधन के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। लेकिन इसके लिए नियमित ऑडिट, सार्वजनिक जवाबदेही और निवेश प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता आवश्यक होगी।
श्रद्धालुओं का भरोसा बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती
मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं हैं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। ऐसे में उनकी निधियों के उपयोग और सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की शंका सार्वजनिक विश्वास को प्रभावित कर सकती है। तमिलनाडु सरकार की संप्रभु गारंटी फिलहाल इन आशंकाओं को दूर करने का प्रयास है, लेकिन आने वाले समय में इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार अपने वादों को कितनी प्रभावी और पारदर्शी तरीके से लागू करती है। राज्य सरकार का संदेश स्पष्ट है—मंदिरों की जमा राशि सुरक्षित है, और उसकी सुरक्षा की अंतिम जिम्मेदारी तमिलनाडु सरकार स्वयं उठाएगी।




