राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 मई 2026
भारत सरकार ने देश की समुद्री और तटीय सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। केंद्र सरकार अब देशभर के लगभग 1200 फिशिंग हार्बर और फिश लैंडिंग साइट्स को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की निगरानी में लाने की योजना बना रही है। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब हिंद महासागर क्षेत्र, अरब सागर और भारत की लंबी समुद्री सीमा को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार सतर्क हैं।
गृह मंत्रालय की इस योजना के तहत CISF न केवल सुरक्षा का ब्लूप्रिंट तैयार करेगी बल्कि स्थानीय प्रशासन और राज्य एजेंसियों को सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने में भी मार्गदर्शन देगी। फिलहाल देश के लगभग 250 बड़े समुद्री बंदरगाह पहले से ही CISF की निगरानी में हैं और अब सरकार इस सुरक्षा दायरे को मछली बंदरगाहों तक विस्तारित करना चाहती है।
1547 फिश लैंडिंग सेंटर सरकार की निगरानी सूची में
सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत के 13 तटीय राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कुल 1547 अधिसूचित फिश लैंडिंग सेंटर और फिशिंग हार्बर मौजूद हैं। इनमें से लगभग 1200 स्थानों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षा निगरानी प्रणाली के तहत लाने की योजना बनाई जा रही है।
इन स्थानों पर हर दिन हजारों मछुआरे, नावें, मालवाहक गतिविधियां और समुद्री व्यापार से जुड़े लोग आते-जाते हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यदि इन जगहों पर निगरानी मजबूत नहीं की गई तो तस्करी, घुसपैठ, हथियारों की आवाजाही और समुद्री आतंकवाद जैसी गतिविधियों का खतरा बना रह सकता है।
26/11 के बाद से लगातार बढ़ी समुद्री सुरक्षा की चिंता
मुंबई 26/11 आतंकी हमले के बाद से भारत की तटीय सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में रही है। जांच एजेंसियों ने तब पाया था कि आतंकवादी समुद्री रास्ते से भारत में दाखिल हुए थे। इसके बाद तटीय सुरक्षा नेटवर्क को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए, लेकिन छोटे मछली बंदरगाह और स्थानीय लैंडिंग प्वाइंट अब भी अपेक्षाकृत कमजोर कड़ी माने जाते रहे हैं।
सरकार का मानना है कि बड़े पोर्ट्स की तरह छोटे फिशिंग हार्बर भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। इन्हीं के जरिए कई बार अवैध घुसपैठ, ड्रग्स तस्करी और संदिग्ध समुद्री गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश होती रही है।
CISF तैयार करेगी सुरक्षा टेम्पलेट
सूत्रों के अनुसार CISF हर फिशिंग हार्बर और लैंडिंग साइट के लिए एक मानक सुरक्षा मॉडल तैयार करेगी। इसमें प्रवेश नियंत्रण, CCTV निगरानी, नावों का डिजिटल रजिस्ट्रेशन, पहचान सत्यापन, संवेदनशील गतिविधियों की मॉनिटरिंग और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली शामिल हो सकती है।
स्थानीय पुलिस, कोस्ट गार्ड, समुद्री सुरक्षा एजेंसियों और राज्य प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर CISF इन बंदरगाहों की सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने की योजना बना रही है।
मछुआरों और स्थानीय समुदाय की भूमिका भी अहम
सरकार की योजना केवल सुरक्षा बलों तक सीमित नहीं होगी बल्कि इसमें मछुआरों और स्थानीय समुद्री समुदायों को भी शामिल किया जाएगा। कई बार समुद्र में सबसे पहले संदिग्ध गतिविधियां मछुआरों की नजर में आती हैं। इसलिए उन्हें “eyes and ears of coastal security” के रूप में प्रशिक्षित करने पर भी जोर दिया जा सकता है।
सरकार पहले भी मछुआरों के लिए पहचान पत्र, ट्रैकिंग सिस्टम और समुद्री सुरक्षा प्रशिक्षण जैसी योजनाएं चला चुकी है। अब CISF की निगरानी व्यवस्था के बाद इन पहलों को और अधिक संगठित रूप मिल सकता है।
बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच रणनीतिक फैसला
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा मामला नहीं बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों से भी जुड़ा है। भारत की समुद्री सीमाएं अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं।
हाल के वर्षों में ड्रोन गतिविधियों, समुद्री तस्करी, अवैध मछली पकड़ने और विदेशी घुसपैठ की घटनाओं ने सरकार को तटीय सुरक्षा को लेकर और अधिक सतर्क कर दिया है। ऐसे में फिशिंग हार्बर और छोटे समुद्री ठिकानों को सुरक्षा नेटवर्क में शामिल करना एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
क्या इससे मछुआरों पर बढ़ेगा दबाव?
हालांकि इस योजना को लेकर कुछ सवाल भी उठने लगे हैं। मछुआरा समुदाय के कुछ प्रतिनिधियों का कहना है कि अत्यधिक निगरानी और कड़े नियमों से छोटे मछुआरों को परेशानी हो सकती है। नावों की जांच, दस्तावेज सत्यापन और आवाजाही पर निगरानी से उनके कामकाज पर असर पड़ सकता है।
सरकार का कहना है कि सुरक्षा और आजीविका के बीच संतुलन बनाकर नीति लागू की जाएगी ताकि आम मछुआरों को किसी तरह की अनावश्यक परेशानी न हो।
समुद्री सुरक्षा का नया अध्याय
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो भारत की तटीय सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। बड़े पोर्ट्स से लेकर छोटे मछली बंदरगाहों तक एकीकृत सुरक्षा प्रणाली बनने से देश की समुद्री सीमाओं की निगरानी पहले से कहीं अधिक मजबूत हो जाएगी।
यह कदम इस बात का संकेत भी है कि भारत अब केवल जमीन और हवाई सीमाओं ही नहीं बल्कि समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को भी राष्ट्रीय सुरक्षा की केंद्रीय रणनीति का हिस्सा बना चुका है।




