राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बेंगलुरु | 29 मई 2026
सिद्धारमैया का इस्तीफा: कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन, लेकिन राजनीति से संन्यास नहीं
कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से चल रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने राजभवन में राज्यपाल थावरचंद गहलोत के विशेष सचिव प्रभुशंकर को अपना इस्तीफा सौंपा। हालांकि राज्यपाल उस समय निजी कारणों से इंदौर गए हुए थे, लेकिन सिद्धारमैया ने भरोसा जताया कि उनके लौटते ही इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाएगा।
इस घटनाक्रम ने न केवल कर्नाटक बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। कांग्रेस पार्टी अब राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के जरिए नई राजनीतिक रणनीति को आगे बढ़ाती दिखाई दे रही है। माना जा रहा है कि डी.के. शिवकुमार अब राज्य के अगले मुख्यमंत्री हो सकते हैं।
“मैं एक accidental politician हूं” — भावुक दिखे सिद्धारमैया
इस्तीफे के बाद सिद्धारमैया ने बेहद भावुक अंदाज में अपनी राजनीतिक यात्रा को याद किया। उन्होंने कहा कि वे “accidental politician” हैं क्योंकि उनके परिवार में कोई भी राजनीति में नहीं था। उन्होंने गांव, किसान और गरीब तबके से निकलकर राजनीति के शीर्ष तक पहुंचने के अपने सफर को याद किया।
उन्होंने साफ किया कि वे सक्रिय राजनीति से दूर नहीं जा रहे हैं और राज्य की राजनीति में उनकी भूमिका आगे भी बनी रहेगी। यह बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है।
कांग्रेस का नया पावर बैलेंस
सिद्धारमैया का इस्तीफा कांग्रेस के अंदर एक बड़े सत्ता संतुलन का हिस्सा माना जा रहा है। लंबे समय से DK शिवकुमार और सिद्धारमैया खेमे के बीच नेतृत्व को लेकर खींचतान की खबरें सामने आती रही थीं। अब पार्टी ने ऐसा रास्ता निकाला है जिसमें दोनों नेताओं की राजनीतिक भूमिका बनी रहे।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान सिद्धारमैया को राज्यसभा भेजकर राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका दे सकती है। वहीं DK शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी दक्षिण भारत में नए नेतृत्व की शुरुआत करना चाहती है।
राहुल गांधी की “2025-2027 रणनीति” का हिस्सा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कर्नाटक में यह बदलाव राहुल गांधी की लंबी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। राहुल गांधी पहले ही कह चुके हैं कि 2025, 2026 और 2027 संगठन निर्माण के वर्ष होंगे। अब कांग्रेस धीरे-धीरे राज्यों में नई और युवा नेतृत्व टीम तैयार करती दिखाई दे रही है।
कर्नाटक में DK शिवकुमार, तेलंगाना में रेवंत रेड्डी, केरल में VD सतीशन, राजस्थान में संभावित रूप से सचिन पायलट और मध्यप्रदेश में जीतू पटवारी जैसे नेताओं को आगे बढ़ाना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
क्या सिद्धारमैया बनेंगे राष्ट्रीय विपक्ष का चेहरा?
मल्लिकार्जुन खड़गे का कार्यकाल समाप्त होने के बाद कांग्रेस संगठन और संसद में नई जिम्मेदारियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि सिद्धारमैया को राज्यसभा लाकर विपक्ष की राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका दी जा सकती है।
उनकी सामाजिक न्याय आधारित राजनीति, ओबीसी वर्ग में पकड़ और लंबे प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए कांग्रेस उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर उपयोग करना चाहती है।
कर्नाटक की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
सिद्धारमैया कर्नाटक की राजनीति में एक बेहद प्रभावशाली नेता रहे हैं। उन्होंने AHINDA (अल्पसंख्यक, हिंदू पिछड़ा वर्ग और दलित) सामाजिक समीकरण के जरिए राज्य में मजबूत राजनीतिक आधार बनाया। उनके इस्तीफे से कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में भावनात्मक असर पड़ सकता है, लेकिन पार्टी इसे नेतृत्व परिवर्तन के जरिए नई ऊर्जा में बदलने की कोशिश करेगी।
वहीं DK शिवकुमार को संगठन और संसाधन प्रबंधन का मजबूत नेता माना जाता है। ऐसे में कांग्रेस प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक ताकत के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
विपक्ष बनाम BJP: 2029 की तैयारी शुरू
कांग्रेस अब केवल तात्कालिक राजनीति नहीं बल्कि 2029 लोकसभा चुनाव की जमीन तैयार करती दिखाई दे रही है। दक्षिण भारत में मजबूत क्षेत्रीय चेहरों को आगे लाकर पार्टी भाजपा के खिलाफ व्यापक विपक्षी गठबंधन की रणनीति बना रही है।
कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन इसी बड़ी राजनीतिक बिसात का हिस्सा माना जा रहा है। कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि वह पुराने नेताओं का सम्मान बनाए रखते हुए नई पीढ़ी को नेतृत्व देने के लिए तैयार है।
आगे क्या?
अब सबकी नजर कांग्रेस विधायक दल की अगली बैठक और हाईकमान के औपचारिक फैसले पर टिकी है। यदि DK शिवकुमार मुख्यमंत्री बनते हैं तो यह कर्नाटक कांग्रेस में एक नए अध्याय की शुरुआत होगी।
लेकिन इससे भी बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस का यह “जनरेशन शिफ्ट मॉडल” 2027 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को नई ताकत दे पाएगा?
फिलहाल इतना साफ है कि कर्नाटक का यह सत्ता परिवर्तन केवल एक राज्य का राजनीतिक बदलाव नहीं बल्कि कांग्रेस की राष्ट्रीय रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।




