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चीन का बड़ा स्पेस मिशन: चांद पर कब्जे की दौड़ में अमेरिका को चुनौती!

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग | 26 मई 2026

दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्तियों के बीच अब मुकाबला सिर्फ जमीन, समुद्र या आसमान तक सीमित नहीं रहा। अब असली जंग अंतरिक्ष में छिड़ चुकी है। चीन ने रविवार देर रात अपने महत्वाकांक्षी “Shenzhou-23” मिशन को लॉन्च कर दुनिया को साफ संदेश दे दिया कि वह चांद पर इंसान भेजने की दौड़ में अमेरिका को कड़ी चुनौती देने के लिए पूरी ताकत झोंक चुका है।

उत्तर-पश्चिम चीन के जियुक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से Long March-2F Y23 रॉकेट के जरिए तीन अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर यह मिशन अंतरिक्ष के लिए रवाना हुआ। खास बात यह है कि इस मिशन में शामिल एक अंतरिक्ष यात्री पूरे एक साल तक चीन के Tiangong स्पेस स्टेशन में रहेगा। यह चीन का अब तक का सबसे लंबा मानव अंतरिक्ष मिशन होगा। चीन इस मिशन के जरिए यह समझना चाहता है कि लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से इंसानी शरीर, दिमाग और मानसिक स्थिति पर क्या असर पड़ता है।

इस मिशन की एक और बड़ी चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि इसमें पहली बार हांगकांग से आने वाले पूर्व पुलिस अधिकारी ली जियायिंग को अंतरिक्ष यात्री बनाया गया है। उनके साथ कमांडर झू यांगझू और पायलट झांग युआनझी भी मिशन का हिस्सा हैं। चीन इस मिशन को सिर्फ वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं बल्कि राष्ट्रीय गौरव और वैश्विक शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी पेश कर रहा है।

दरअसल, चीन का असली लक्ष्य 2030 तक चांद पर इंसान उतारना और 2035 तक वहां स्थायी बेस बनाना है। यही वजह है कि अब अमेरिका और चीन के बीच “Moon Race” तेज हो गई है। अमेरिका की NASA जहां 2028 तक इंसानों को चांद पर उतारने की तैयारी में है, वहीं चीन उससे दो साल बाद 2030 का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। लेकिन चीन की तेजी ने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है।

अमेरिका पहले ही आरोप लगा चुका है कि चीन भविष्य में चांद के संसाधनों और जमीन पर कब्जा करना चाहता है। हालांकि बीजिंग इन आरोपों को सिरे से खारिज करता है। चीन का कहना है कि उसका अंतरिक्ष कार्यक्रम शांति, विज्ञान और मानवता के भविष्य के लिए है। लेकिन जिस रफ्तार से चीन अपने स्पेस मिशनों को आगे बढ़ा रहा है, उसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

पिछले कुछ वर्षों में चीन ने लगातार बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। जून 2024 में चीन दुनिया का पहला देश बना जिसने चांद के उस हिस्से से मिट्टी और नमूने वापस लाए जिसे “Far Side of Moon” कहा जाता है। अब Shenzhou-23 मिशन के जरिए चीन ऐसी तकनीकों का परीक्षण करेगा जो भविष्य में इंसानी चंद्र मिशन के लिए बेहद जरूरी होंगी।

इस मिशन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होगा Tiangong स्पेस स्टेशन के साथ ऑटोमैटिक और बेहद तेज docking system का परीक्षण। यही तकनीक आगे चलकर चांद की कक्षा में स्पेसक्राफ्ट और लूनर लैंडर को जोड़ने में इस्तेमाल होगी। आसान भाषा में कहें तो चीन अभी से चांद पर उतरने की पूरी रिहर्सल कर रहा है।

इतना ही नहीं, चीन ने अंतरिक्ष में इंसानी “Artificial Embryo” यानी कृत्रिम भ्रूण पर दुनिया का पहला प्रयोग भी शुरू कर दिया है। चीनी वैज्ञानिक यह जानना चाहते हैं कि क्या भविष्य में इंसान लंबे समय तक अंतरिक्ष या चांद पर रहकर जीवन को आगे बढ़ा सकता है। यह सुनने में साइंस फिक्शन जैसा लगता है, लेकिन चीन इसे वास्तविकता बनाने में जुटा हुआ है।

दूसरी तरफ अमेरिका भी पीछे नहीं है। हाल ही में NASA के Artemis-II मिशन ने आधी सदी बाद इंसानों को चांद के आसपास भेजकर इतिहास रचा। वहीं Elon Musk की SpaceX लगातार Starship रॉकेट के जरिए चंद्र मिशन की तैयारी कर रही है।

अब दुनिया की नजर इस बात पर टिक गई है कि आखिर चांद पर पहले स्थायी ठिकाना कौन बनाएगा — अमेरिका या चीन? लेकिन इतना तय है कि आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष सिर्फ विज्ञान का नहीं बल्कि वैश्विक ताकत, तकनीक और रणनीतिक प्रभुत्व का सबसे बड़ा मैदान बनने जा रहा है।

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