अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 24 मई 2026
दुनिया की बदलती भू-राजनीति, चीन की बढ़ती आक्रामकता और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन की जंग के बीच QUAD को लेकर बड़ा संदेश सामने आया है। जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने साफ कहा है कि QUAD आज भी “बेहद महत्वपूर्ण और जीवंत रणनीतिक ढांचा” है और इसकी प्रासंगिकता पहले से ज्यादा बढ़ी है। नई दिल्ली में QUAD विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले दिए गए उनके बयान को हिंद-प्रशांत राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है। मोतेगी ने कहा कि आने वाले समय में “क्रिटिकल मिनरल्स” यानी ग्रीन एनर्जी, सेमीकंडक्टर और हाई-टेक इंडस्ट्री के लिए जरूरी खनिजों पर सहयोग QUAD एजेंडे का सबसे अहम हिस्सा होगा। जापान भारत में कई महत्वपूर्ण खनिज परियोजनाओं पर काम कर रहा है, लेकिन उसने भारत से बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, टैक्स सब्सिडी और बौद्धिक संपदा अधिकारों की मजबूत सुरक्षा की भी मांग की है।
इस अहम बैठक की मेजबानी विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर करेंगे, जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री शामिल होंगे। माना जा रहा है कि बैठक में ईरान संकट, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव, चीन की रणनीतिक गतिविधियों और वैश्विक सप्लाई चेन सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि QUAD अब केवल एक कूटनीतिक मंच नहीं बल्कि चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने वाली बड़ी रणनीतिक साझेदारी बन चुका है। खासतौर पर अमेरिका-चीन तनाव, ताइवान मुद्दे और हिंद महासागर में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच QUAD देशों की एकजुटता दुनिया की नजर में बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
भारत के लिए भी यह बैठक कई मायनों में अहम मानी जा रही है। एक तरफ भारत अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ आर्थिक और रक्षा साझेदारी मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता भी बनाए रखना चाहता है। यही कारण है कि QUAD अब सिर्फ सुरक्षा नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, व्यापार और सप्लाई चेन की वैश्विक राजनीति का भी केंद्र बनता जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले वर्षों में QUAD एशिया की शक्ति राजनीति का सबसे प्रभावशाली समूह बन सकता है और भारत इसमें निर्णायक भूमिका निभाने की स्थिति में दिखाई दे रहा है।




