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नेपाल के चितवन में शहरों तक पहुंच रहे गैंडे, बढ़ी लोगों की चिंता और वन्यजीव संरक्षण पर बहस

अंतरराष्ट्रीय / पर्यावरण | ABC NATIONAL NEWS | चितवन (नेपाल) | 24 मई 2026

नेपाल के प्रसिद्ध चितवन नेशनल पार्क के आसपास अब एक नया और चिंताजनक दृश्य आम होता जा रहा है। रात के अंधेरे में शहर की सड़कों पर दौड़ते एक सींग वाले गैंडे, बाजारों और रिहायशी इलाकों के पास घूमते वन्यजीव और मोबाइल कैमरों में कैद होते ये दृश्य अब केवल पर्यटकों के आकर्षण का विषय नहीं रह गए हैं, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए डर और असुरक्षा का कारण बनते जा रहे हैं। नेपाल के भरतपुर और नारायणगढ़ जैसे शहरी इलाकों में गैंडों की बढ़ती मौजूदगी ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर गैंडे शहर में आ रहे हैं या इंसानी बस्तियां धीरे-धीरे उनके प्राकृतिक आवास में घुसती चली गई हैं।

चितवन नेशनल पार्क लंबे समय से दुर्लभ एक सींग वाले गैंडों का सबसे बड़ा आश्रय स्थल माना जाता है। लेकिन हाल के वर्षों में गैंडों की गतिविधियां पार्क की सीमाओं से निकलकर नगर क्षेत्रों, सामुदायिक जंगलों और खेतों तक पहुंच गई हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार अब रात के समय गैंडों का सड़कों और घरों के आसपास घूमना सामान्य बात बन चुकी है। कई जगहों पर गैंडों के झुंड और उनके बच्चों को भी देखा गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में भरतपुर के चौबिसकोठी चौराहे पर गैंडे को सड़क पर दौड़ते हुए देखा गया, जबकि सौराहा इलाके में दो नर गैंडों की सड़क पर लड़ाई का वीडियो भी चर्चा में रहा।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह केवल रोमांच का विषय नहीं बल्कि जान का खतरा बनता जा रहा है। जनवरी 2026 में भरतपुर निवासी 65 वर्षीय तेज बहादुर पाठक की गैंडे के हमले में मौत हो गई थी। वह रोज की तरह शाम को पशु चराने गए थे लेकिन वापस नहीं लौटे। अगले दिन उनका शव घर से कुछ दूरी पर मिला। आसपास रहने वाले लोग बताते हैं कि अब सुबह और देर शाम बाहर निकलना जोखिम भरा महसूस होता है, क्योंकि यही समय गैंडों की सक्रियता का भी होता है। कई बुजुर्गों ने अपने रोजमर्रा के रास्ते तक बदल दिए हैं।

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि गैंडों के व्यवहार और उनके आवास में बदलाव के पीछे कई कारण हो सकते हैं। जंगलों में घास और भोजन की कमी, बढ़ते शहरी विस्तार, जलवायु परिवर्तन और नर गैंडों के बीच संघर्ष जैसी स्थितियां उन्हें नई जगहों की ओर धकेल रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कमजोर नर गैंडे अक्सर प्रभुत्वशाली गैंडों से संघर्ष के बाद जंगल छोड़कर मानव बस्तियों की ओर चले जाते हैं। वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोग यह भी मानते हैं कि पिछले वर्षों में सामुदायिक जंगलों और हरित क्षेत्रों के विस्तार ने शहरों के आसपास ऐसे नए कॉरिडोर बना दिए हैं, जहां गैंडों को भोजन और सुरक्षित ठिकाने मिल रहे हैं।

नेपाल सरकार और वन विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इंसानों और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखने की है। अधिकारियों का कहना है कि सीमित बजट और संसाधनों के कारण पर्याप्त बाड़बंदी और सुरक्षा व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है। आंकड़ों के अनुसार नेपाल में कुल 752 गैंडे हैं, जिनमें से 694 चितवन नेशनल पार्क और आसपास के क्षेत्रों में रहते हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में वन्यजीव हमलों में 10 लोगों की मौत हुई, जिनमें से 8 मौतें गैंडों के हमले से हुईं। वहीं गैंडे खुद भी सुरक्षित नहीं हैं—इस वर्ष दो गैंडों की बिजली करंट लगने से मौत हो चुकी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि चितवन अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां जंगल और शहर की सीमाएं तेजी से धुंधली होती जा रही हैं। यदि समय रहते वैज्ञानिक शोध, बेहतर वन्यजीव प्रबंधन और मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व की नई रणनीति नहीं बनाई गई, तो आने वाले वर्षों में यह संघर्ष और गंभीर रूप ले सकता है।

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