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इबोला का बढ़ता खतरा, कांगो से लौटने वाले सैनिकों के लिए नेपाल सेना ने लागू किया 21 दिन का आइसोलेशन

अंतरराष्ट्रीय / स्वास्थ्य | कुश बहादुर थापा | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू | 24 मई 2026

अफ्रीकी देशों में तेजी से फैल रहे इबोला वायरस के खतरे को देखते हुए नेपाल सरकार और नेपाली सेना अलर्ट मोड में आ गई है। नेपाली सेना ने फैसला लिया है कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DR Congo) से लौटने वाले सभी शांति सैनिकों को अनिवार्य रूप से 21 दिनों तक आइसोलेशन में रखा जाएगा। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब कांगो और युगांडा में फैले बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के इबोला संक्रमण ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक इस संक्रमण से कम से कम 144 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 600 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं। विशेषज्ञों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि इस विशेष स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत इस समय 970 से अधिक नेपाली सैनिक कांगो में तैनात हैं। इनमें कई सैनिक इतुरी प्रांत के बुनिया क्षेत्र में मौजूद हैं, जिसे हालिया इबोला प्रकोप का केंद्र माना जा रहा है। नेपाली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजाराम बस्नेत ने कहा कि इबोला प्रभावित देशों से लौटने वाले किसी भी सैनिक को 21 दिन की निगरानी और आइसोलेशन पूरा किए बिना परिवार या आम लोगों से मिलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि सेना स्वास्थ्य मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय कर रही है ताकि संक्रमण के किसी भी संभावित खतरे को रोका जा सके।

नेपाली सेना ने कांगो में तैनात सैनिकों के लिए भी सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए हैं। सेना के अनुसार, बैरक से बाहर जाने वाले जवानों की भी विशेष निगरानी की जा रही है। फिलहाल सैनिकों की नियमित रोटेशन प्रक्रिया को भी रोक दिया गया है, हालांकि आपातकालीन परिस्थितियों में लौटने वाले जवानों को भी आइसोलेशन में रखा जाएगा। राहत की बात यह है कि अभी तक किसी नेपाली सैनिक में इबोला संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर भारत ने भी इबोला प्रभावित अफ्रीकी देशों को लेकर ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर दी है और स्वास्थ्य आपात स्थिति को देखते हुए भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन को स्थगित कर दिया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल और दक्षिण एशिया के अन्य देश वैश्विक आवाजाही के कारण संक्रामक बीमारियों के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों और प्रवासी श्रमिकों की आवाजाही संक्रमण के जोखिम को बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों ने सरकारों से एयरपोर्ट निगरानी, लैब क्षमता, स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण और सर्विलांस सिस्टम को और मजबूत करने की अपील की है। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने फिलहाल इस प्रकोप को वैश्विक महामारी घोषित नहीं किया है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि लापरवाही या देर भविष्य में गंभीर संकट पैदा कर सकती है।

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