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ओबीसी के अधिकारों की हुंकार: राष्ट्रीय जाति जनगणना की मांग

बेंगलुरु, कर्नाटक

17 जुलाई 2025

कांग्रेस की ओबीसी सलाहकार परिषद ने यह स्पष्ट मांग उठाई कि शिक्षा, नौकरियों, राजनीति और अन्य क्षेत्रों में ओबीसी वर्ग को उसका हक देने के लिए आरक्षण पर 50% की वर्तमान सीमा को समाप्त किया जाए, ताकि समान अवसर और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।

घोषणापत्र की मुख्य बातें

कांग्रेस की ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) सलाहकार परिषद ने बेंगलुरु में आयोजित बैठक में एक अहम घोषणापत्र पारित किया, जिसमें राष्ट्रीय जाति आधारित जनगणना को तुरंत कराने की मांग की गई। परिषद ने इसे सामाजिक न्याय और समान भागीदारी की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम करार दिया। यह घोषणापत्र ओबीसी समाज के अधिकारों की बहाली और उनकी वास्तविक स्थिति को आंकड़ों के आधार पर समझने की दिशा में पार्टी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

कांग्रेस का रुख और रणनीति

घोषणापत्र में साफ कहा गया कि बिना आंकड़ों के ‘सबका साथ, सबका विकास’ सिर्फ एक नारा बनकर रह जाएगा। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर ओबीसी समाज की गिनती से भाग रही है ताकि उनकी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हिस्सेदारी को नज़रअंदाज़ किया जा सके। पार्टी का कहना है कि जातिगत जनगणना से नीतियों को न्यायपूर्ण आधार मिलेगा।

अगली रणनीति और अभियान

बैठक में यह भी तय हुआ कि कांग्रेस ओबीसी विंग देशभर में जनजागरूकता अभियान चलाएगा, ताकि जाति जनगणना की मांग को ज़मीन तक पहुंचाया जा सके। इसमें छात्रों, युवाओं, किसान संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। बेंगलुरु घोषणापत्र को पार्टी के आगामी चुनावी एजेंडे में भी प्रमुख स्थान दिया जाएगा।

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