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2028 तक आधा सरकारी काम AI संभालेगा, UAE का बड़ा दांव—सुविधा बढ़ेगी या नौकरियां जाएंगी?

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साइंस टेक्नोलॉजी/ जॉब / अंतरराष्ट्रीय | सफवान बिन फरहान | ABC NATIONAL NEWS | दुबई/अबू धाबी | 26 अप्रैल 2026

तकनीक की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ रहे संयुक्त अरब अमीरात ने अब शासन व्यवस्था में ऐसा प्रयोग शुरू किया है, जो आने वाले समय में पूरी दुनिया की दिशा बदल सकता है। देश ने लक्ष्य तय किया है कि वर्ष 2028 तक उसकी करीब 50% सरकारी सेवाएं “एजेंटिक एआई” के जरिए संचालित होंगी। यानी अब सरकार का आधा काम इंसानों की जगह मशीनें करेंगी—और यह बदलाव केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया तक पहुंचेगा। यही वजह है कि इसे सिर्फ तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि शासन प्रणाली की “खामोश क्रांति” कहा जा रहा है। इस नई व्यवस्था में “एजेंटिक एआई” की भूमिका सबसे अहम है। यह पारंपरिक एआई से अलग है, क्योंकि यह सिर्फ सुझाव नहीं देता, बल्कि खुद काम करके देता है। मान लीजिए आपको कोई लाइसेंस बनवाना है, किसी योजना के लिए आवेदन करना है या किसी दस्तावेज की मंजूरी चाहिए—तो आपको दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। सिस्टम खुद आपकी जरूरत समझेगा, जरूरी डेटा जुटाएगा और काम पूरा करके देगा। यानी सरकारी तंत्र एक “डिजिटल कर्मचारी” में बदल जाएगा, जो 24 घंटे बिना थके काम करेगा।

इस पूरी योजना की निगरानी शेख मंसूर बिन जायद अल नाहयान के नेतृत्व में की जा रही है। सरकार इसे धीरे-धीरे लागू कर रही है ताकि झटका अचानक न लगे। कर्मचारियों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे इस नई तकनीक के साथ तालमेल बैठा सकें। लेकिन असली सवाल यहीं से शुरू होता है—जब मशीनें काम करेंगी, तो इंसानों का क्या होगा?

अगर इस योजना का गहराई से विश्लेषण करें, तो एक दिलचस्प और थोड़ा चिंताजनक चित्र सामने आता है। आम तौर पर सरकारी तंत्र में बड़ी संख्या ऐसे कामों की होती है जो दोहराव वाले होते हैं—जैसे डेटा एंट्री, फाइल प्रोसेसिंग, वेरिफिकेशन, रिकॉर्ड मैनेजमेंट आदि। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे कामों का लगभग 60% से 70% हिस्सा एआई आसानी से संभाल सकता है। चूंकि यूएई 50% सरकारी सेवाओं को एआई के हवाले करने जा रहा है, इसलिए अनुमान लगाया जा रहा है कि कुल सरकारी कार्यबल का लगभग 20% से 30% हिस्सा सीधे तौर पर प्रभावित हो सकता है।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इतने लोग अचानक बेरोजगार हो जाएंगे। हकीकत थोड़ी अलग है। इनमें से कई नौकरियां खत्म होने के बजाय बदल जाएंगी। उदाहरण के लिए, जहां पहले 10 लोग एक ही तरह का काम करते थे, वहां अब 3-4 लोग एआई सिस्टम को मैनेज करेंगे, उसकी निगरानी करेंगे और जटिल मामलों को संभालेंगे। यानी “नौकरी खत्म” होने के साथ-साथ “नई तरह की नौकरियां” भी पैदा होंगी—जैसे एआई ऑपरेटर, डेटा एनालिस्ट, सिस्टम सुपरवाइजर और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट।

फिर भी, एक वर्ग ऐसा जरूर होगा जो इस बदलाव के साथ खुद को ढाल नहीं पाएगा। खासकर वे लोग जिनकी स्किल सीमित है या जो लंबे समय से एक ही तरह का काम कर रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए खतरा ज्यादा है। अगर प्रशिक्षण और पुनःकौशल (री-स्किलिंग) पर ध्यान नहीं दिया गया, तो लगभग 10% से 15% कर्मचारियों के लिए वास्तविक बेरोजगारी का जोखिम पैदा हो सकता है।

दूसरी ओर, आम नागरिकों के लिए यह बदलाव काफी राहत देने वाला साबित हो सकता है। लंबी लाइनें, फाइलों का अटकना, देरी और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं काफी हद तक कम हो सकती हैं। सेवाएं तेज, पारदर्शी और अधिक भरोसेमंद बनेंगी। यानी जहां एक तरफ सिस्टम स्मार्ट होगा, वहीं दूसरी तरफ इंसानों के सामने खुद को “और स्मार्ट” बनाने की चुनौती भी होगी।

संयुक्त अरब अमीरात का यह कदम एक बड़ा प्रयोग है—जिसमें सुविधा और खतरा दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। अगर यह मॉडल सफल होता है, तो दुनिया के दूसरे देश भी इसे अपनाने की राह पर चल सकते हैं। लेकिन एक बात साफ है—आने वाला समय केवल नौकरी का नहीं, बल्कि “स्किल” का होगा। जो बदलेगा, वही टिकेगा।

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