राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 25 अप्रैल 2026
देश की आर्थिक नीति से जुड़े सबसे अहम संस्थान नीति आयोग में बड़ा बदलाव हुआ है। वरिष्ठ अर्थशास्त्री Ashok Lahiri को नीति आयोग का नया उपाध्यक्ष बनाया गया है। नियुक्ति के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi से मुलाकात भी की। माना जा रहा है कि “विकसित भारत” के विजन को आगे बढ़ाने में लाहिड़ी की अहम भूमिका रहने वाली है।
कौन हैं अशोक लाहिड़ी?
अशोक लाहिड़ी देश के अनुभवी अर्थशास्त्रियों में गिने जाते हैं। उनका करियर चार दशकों से ज्यादा लंबा रहा है। वे भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) रह चुके हैं और वित्त आयोग में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने एशियाई विकास बैंक, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसे बड़े वैश्विक संस्थानों के साथ भी काम किया है।
कोलकाता से ताल्लुक रखने वाले लाहिड़ी ने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और प्रेसिडेंसी यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। अर्थव्यवस्था और नीति निर्माण के क्षेत्र में उनका अनुभव उन्हें इस पद के लिए खास बनाता है।
पीएम मोदी से मुलाकात
नियुक्ति के बाद लाहिड़ी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात को औपचारिक माना जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही यह भी संकेत है कि आने वाले समय में नीति आयोग की दिशा और कामकाज को लेकर नई रणनीति तैयार की जा सकती है।
गोबर्धन दास भी बने सदस्य
नीति आयोग में एक और अहम नियुक्ति हुई है। जाने-माने वैज्ञानिक Gobardhan Das को आयोग का सदस्य बनाया गया है। डॉ. दास आणविक विज्ञान के प्रोफेसर हैं और उन्होंने करीब 30 साल तक वैज्ञानिक शोध में काम किया है। उनकी खास पहचान प्रतिरक्षा विज्ञान, संक्रामक रोग और कोशिका जीव विज्ञान के क्षेत्र में है। तपेदिक (TB) पर उनके शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।
संघर्ष से सफलता तक की कहानी
डॉ. गोबर्धन दास की जिंदगी खुद में एक प्रेरणा है। वे एक ऐसे परिवार से आते हैं, जिसे कभी मजबूरी में अपना घर छोड़ना पड़ा था। बेहद कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई करते हुए उन्होंने बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं। बताया जाता है कि उन्होंने कभी स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठकर पढ़ाई की थी। आज वही शख्स देश के बड़े वैज्ञानिक संस्थानों में नेतृत्व कर रहा है और अब नीति आयोग जैसे महत्वपूर्ण मंच का हिस्सा बन गया है।
क्या है इसका मतलब?
विशेषज्ञ मानते हैं कि इन दोनों नियुक्तियों से सरकार ने साफ संकेत दिया है कि वह अनुभव और विशेषज्ञता पर जोर दे रही है। एक तरफ लाहिड़ी जैसे अनुभवी अर्थशास्त्री हैं, तो दूसरी तरफ दास जैसे वैज्ञानिक, जिनका फोकस रिसर्च और इनोवेशन पर है।
आने वाले समय में नीति आयोग की नीतियों में अर्थव्यवस्था और विज्ञान—दोनों का संतुलन देखने को मिल सकता है। नीति आयोग की नई टीम से उम्मीदें बढ़ गई हैं। अब देखना होगा कि ये नई नियुक्तियां देश के विकास को किस दिशा में ले जाती हैं।




