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10 साल से लंबित केस ने तोड़ा हौसला, साकेत कोर्ट की चौथी मंजिल से कूदने चला शख्स—वकीलों ने बचाई जान

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता

लंबी कानूनी लड़ाई बनी मानसिक बोझ

दक्षिणी दिल्ली स्थित साकेत कोर्ट कॉम्प्लेक्स में उस समय सनसनी फैल गई जब एक व्यक्ति ने अपने 10 साल पुराने केस से परेशान होकर आत्महत्या करने की कोशिश की। जानकारी के मुताबिक, वह लंबे समय से न्याय की उम्मीद में अदालतों के चक्कर काट रहा था, लेकिन लगातार टलती सुनवाई और फैसले में देरी ने उसे अंदर से तोड़ दिया था। यही मानसिक दबाव उसे इस खतरनाक कदम तक ले आया।

चौथी मंजिल पर चढ़कर उठाया खौफनाक कदम

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, व्यक्ति कोर्ट परिसर के वकीलों के चैंबर ब्लॉक की चौथी मंजिल पर पहुंचा और अचानक रेलिंग पार कर नीचे कूदने की कोशिश करने लगा। वह कुछ देर तक किनारे पर लटका रहा, जिससे नीचे खड़े लोगों में दहशत फैल गई। मौके पर मौजूद लोगों की नजर जब उस पर पड़ी तो अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

वकीलों ने दिखाई हिम्मत, बच गई एक जान

घटना के दौरान वहां मौजूद वकीलों ने तुरंत साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। बिना समय गंवाए उन्होंने उस व्यक्ति को पकड़ने की कोशिश की और काफी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित अंदर खींच लिया। चंद सेकंड की देरी जानलेवा साबित हो सकती थी, लेकिन वकीलों की तत्परता ने एक बड़ी त्रासदी टाल दी।

न्याय में देरी पर फिर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर न्याय व्यवस्था में हो रही देरी की गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है। वर्षों तक चलने वाले मुकदमे न केवल आर्थिक रूप से, बल्कि मानसिक रूप से भी लोगों को तोड़ देते हैं। ऐसे कई लोग हैं जो न्याय की आस में अपनी पूरी जिंदगी खपा देते हैं, लेकिन फैसले तक नहीं पहुंच पाते।

वीडियो वायरल, बहस तेज
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। एक ओर लोग वकीलों की बहादुरी की सराहना कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर न्याय में हो रही देरी और सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
साकेत कोर्ट की यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं, बल्कि उस व्यापक समस्या की झलक है जिसमें न्याय मिलने में देरी इंसान को निराशा के अंधेरे में धकेल देती है। समय पर न्याय मिलना सिर्फ अधिकार नहीं, बल्कि किसी की जिंदगी बचाने का माध्यम भी बन सकता है।

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