[the_ad id="179"]
Home » International » 7 साल बाद ईरान से तेल खरीदेगा भारत, इस हफ्ते पहुंचेगी पहली खेप

7 साल बाद ईरान से तेल खरीदेगा भारत, इस हफ्ते पहुंचेगी पहली खेप

व्यापार/अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 8 अप्रैल 2026

करीब सात साल के लंबे अंतराल के बाद भारत एक बार फिर ईरान से कच्चे तेल की खरीद शुरू करने जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सप्ताह भारत को ईरान से तेल की पहली खेप मिलने वाली है, जो 2019 के बाद पहली बार होगा जब दोनों देशों के बीच यह व्यापार फिर से शुरू हो रहा है। बताया जा रहा है कि एक बड़ा तेल टैंकर भारत के पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है और इसके कुछ दिनों में पहुंचने की संभावना है।

भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, ने 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव के चलते ईरान से तेल आयात बंद कर दिया था। उस समय अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, जिसके चलते कई देशों को अपनी ऊर्जा रणनीति बदलनी पड़ी थी। लेकिन अब बदलते वैश्विक हालात और ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधाओं के बीच भारत ने फिर से ईरानी तेल की ओर रुख किया है।

इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में जारी तनाव और तेल सप्लाई पर पड़ा असर माना जा रहा है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में बाधा आने से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर भी पड़ा। ऐसे में भारतीय रिफाइनरियों ने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए ईरान सहित विभिन्न स्रोतों से तेल खरीदने का फैसला लिया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बार भारत की सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने यह तेल खरीदा है, और भुगतान को लेकर भी किसी तरह की दिक्कत सामने नहीं आई है। सरकार का कहना है कि देश की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न देशों से तेल खरीदना एक सामान्य और व्यावसायिक प्रक्रिया है, और भारत 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल आयात करता है।

भारत द्वारा ईरानी तेल की खरीद दोबारा शुरू करना न केवल ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम है, बल्कि यह वैश्विक तेल बाजार में भी हलचल पैदा कर सकता है। इससे एक ओर जहां भारत को सस्ता और स्थिर आपूर्ति विकल्प मिल सकता है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और प्रतिबंधों की राजनीति पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। सात साल बाद ईरान से तेल आयात की वापसी भारत की ऊर्जा रणनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह आपूर्ति कितनी नियमित होती है और इसका असर घरेलू तेल कीमतों तथा वैश्विक बाजार पर किस रूप में सामने आता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *