राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 5 अप्रैल 2026
महिलाओं की सुरक्षा और सरकारी योजनाओं को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। लोकसभा में नेता विपक्ष Rahul Gandhi ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देश में महिलाएं मदद के लिए दरवाज़ा खटखटा रही हैं, लेकिन सरकार ने उनके लिए दरवाज़े बंद कर रखे हैं। उनका यह बयान वन स्टॉप सेंटर (OSC) से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर उठाए गए सवालों के बीच आया है, जिसने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।
राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने संसद में यह सवाल उठाया था कि जब कोई महिला हिंसा से बचकर वन स्टॉप सेंटर पहुंचती है, तो उसे वहां मदद क्यों नहीं मिलती। उन्होंने पूछा कि कई जगहों पर सेंटर बंद क्यों मिलते हैं, स्टाफ की कमी क्यों है और देशभर से आने वाली शिकायतों को नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है। उनके मुताबिक, यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि ये सेंटर उन महिलाओं के लिए बनाए गए हैं जो मुश्किल हालात में सहारा तलाशती हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि जब इन सवालों का जवाब सरकार से मांगा गया, तो सरकार की ओर से कहा गया कि सब कुछ “संतोषजनक” है। राहुल गांधी ने इस जवाब पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर सब कुछ ठीक है, तो फिर लगातार सामने आ रही समस्याओं और शिकायतों की खबरें क्यों आ रही हैं। उनका कहना था कि जमीनी हकीकत और सरकारी दावों में बड़ा अंतर दिखाई देता है।
राहुल गांधी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अगर महिलाओं की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है, तो फिर हर पांच में से तीन महिलाओं तक मदद क्यों नहीं पहुंच पा रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के बजट में से हर 100 रुपये में सिर्फ 60 पैसे ही वन स्टॉप सेंटर पर खर्च क्यों किए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, यह आंकड़े दिखाते हैं कि सरकार इस मुद्दे को उतनी गंभीरता से नहीं ले रही, जितनी लेनी चाहिए।
अपने बयान में राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा कोई योजना या विकल्प नहीं, बल्कि सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि हर समस्या को “संतोषजनक” बताकर सरकार असल मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना था कि इस तरह का रवैया यह दर्शाता है कि सरकार जमीनी स्तर पर लोगों की समस्याओं को सुनने और समझने के बजाय उन्हें नजरअंदाज कर रही है।
हालांकि, इस मुद्दे पर सरकार की ओर से अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर महिलाओं की सुरक्षा और सरकारी जवाबदेही से जुड़ा हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वन स्टॉप सेंटर जैसी योजनाएं महिलाओं को त्वरित सहायता देने के लिए बेहद अहम हैं, और अगर इनमें कमियां हैं, तो उन्हें तुरंत दूर किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इस तरह के मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ जमीनी सुधार भी जरूरी है, ताकि जरूरतमंद महिलाओं तक सही समय पर मदद पहुंच सके।राहुल गांधी के इस बयान ने महिलाओं की सुरक्षा और सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इन सवालों का क्या जवाब देती है और क्या जमीनी स्तर पर कोई सुधार देखने को मिलता है या नहीं।




