राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 3 अप्रैल 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेशी नेताओं से मुलाकात के दौरान के व्यवहार पर बने एक व्यंग्यात्मक पैरोडी वीडियो को भारतीय अधिकारियों द्वारा हटवाए जाने के बाद अब यह मामला पूरी दुनिया में चर्चा का केंद्र बन गया है। कॉमेडियन पुलकित मणि, जिन्हें सोशल मीडिया पर @hunnywhoisfunny के नाम से जाना जाता है, ने यह रील बनाई थी जिसमें उन्होंने मोदी जी के विदेशी दौरों पर विदेशी नेताओं को जोरदार गले लगाने, जोर-जोर से हंसने और कुछ-कुछ अस्पष्ट तरीके से बोलने जैसे अंदाज को काफी करीब से मिमिक किया था। इस रील को इंस्टाग्राम पर 1.6 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिल चुके थे, लेकिन 18 मार्च को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की शिकायत पर इंस्टाग्राम ने इसे भारत में ब्लॉक कर दिया। प्लेटफॉर्म ने साफ नोटिस दिया कि यह “legal demand” के तहत withheld किया गया है।
जैसे ही इस वीडियो को हटाने की खबर फैली, वही वीडियो और उसकी कई कॉपीज सोशल मीडिया पर और भी तेजी से वायरल हो गईं। यूट्यूबर द्रुव राठी ने इसे दोबारा पोस्ट किया और कहा कि अगर मोदी जी की तारीफ की जाए तो फिल्में बड़ी स्क्रीन्स पर दिखवाई जाती हैं, लेकिन उनकी हकीकत को कॉमेडी के जरिए भी दिखाने की कोशिश की जाए तो सोशल मीडिया से हटा दिया जाता है। द्रुव राठी का यह पोस्ट भी करोड़ों व्यूज पार कर गया। अब विदेशी मीडिया जैसे द डिप्लोमैट ने इस पूरे मामले को प्रमुखता से कवर किया है और लिखा है कि प्रधानमंत्री मोदी की हग डिप्लोमेसी यानी गले लगाने वाली विदेश नीति को व्यंग्य का निशाना बनाया गया था, लेकिन सरकार इसे बर्दाश्त नहीं कर पाई।
इस कार्रवाई को लेकर आलोचक सरकार पर तीखे हमले कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिस वीडियो को शुरू में सीमित लोग ही देख रहे थे, उसे दबाने की कोशिश ने उसे पूरी दुनिया के सामने ला दिया। सोशल मीडिया पर लोग तंज कस रहे हैं कि 150 करोड़ की आबादी वाले देश में एक कॉमेडी रील को इतना बड़ा खतरा मान लिया गया कि IT एक्ट के तहत तुरंत हटाना पड़ा। वरिष्ठ पत्रकार अरफा खानम शेरवानी ने इसे “डंका! डंका! डंका!” कहकर व्यंग्य किया। कई लोग लिख रहे हैं कि सरकार की यह रणनीति उल्टी पड़ गई है क्योंकि अब विदेशी अखबार और मैगजीन इस खबर को प्रमुखता से छाप रहे हैं और भारत में अभिव्यक्ति की आजादी पर सवाल उठा रहे हैं।
यह पहला मामला नहीं है जब मोदी सरकार ने व्यंग्यात्मक कंटेंट पर सख्ती दिखाई हो। हाल के हफ्तों में दर्जनों पैरोडी अकाउंट्स जैसे @Nehr_who, @DrNimoYadav समेत कई अन्य को ब्लॉक किया गया है। आलोचक कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने खुद कई बार कहा है कि आलोचना लोकतंत्र की आत्मा है, लेकिन उनके शासन में सैटायर और मीम्स को भी राष्ट्रीय गरिमा के खिलाफ बताकर दबाया जा रहा है। खासतौर पर विदेश नीति को पूरी तरह से मोदी जी की व्यक्तिगत ब्रांडिंग से जोड़ने पर सवाल उठ रहे हैं। जब देश में LPG की कमी जैसी घरेलू समस्याएं हैं, तब विदेशी नेताओं के साथ व्यक्तिगत दोस्ती और हग का इतना फोकस कई लोगों को दिखावा लगता है। इसी को पैरोडी में उछाला गया था, लेकिन सरकार ने इसे बर्दाश्त नहीं किया।
सरकार की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं आया है। सिर्फ IT एक्ट का हवाला देकर प्लेटफॉर्म्स को नोटिस भेजे गए। लेकिन विपक्ष और नागरिक समाज इसे डिजिटल सेंसरशिप की निशानी बता रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या एक लोकतांत्रिक देश में कॉमेडी और व्यंग्य को भी इतनी आसानी से दबाया जा सकता है। इस घटना ने बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं कि डिजिटल युग में सरकार की भूमिका क्या होनी चाहिए। क्या व्यंग्य को राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा मान लिया जाएगा?
अब यह विवाद केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं रह गया है। विदेशी मीडिया में भारत की छवि और लोकतांत्रिक मूल्यों पर बहस छिड़ गई है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है। अगर और सख्ती की गई तो विवाद और गहरा सकता है, वरना यह एक और उदाहरण बन जाएगा कि दबाने की कोशिश अक्सर उल्टी पड़ जाती है और जिस कंटेंट को छिपाने की कोशिश की जाती है, वही सबसे ज्यादा फैलता है। (खबर वास्तविक रिपोर्ट्स, द डिप्लोमैट, स्क्रॉल और सोशल मीडिया घटनाक्रम पर आधारित।)




