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बीजेपी गए 273 नेता करना चाहते हैं वापसी — जीतू पटवारी

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | भोपाल | 2 अप्रैल 2026

मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। जीतू पटवारी के एक बड़े बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में गए 273 वरिष्ठ नेता अब दोबारा कांग्रेस में लौटना चाहते हैं। पटवारी के इस बयान को प्रदेश की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों का संकेत माना जा रहा है, जहां चुनावी समीकरणों से पहले ही दल-बदल की नई बयार बहती नजर आ रही है। मीडिया से बातचीत के दौरान जब उनसे सीधा सवाल किया गया कि ईमानदारी से बताएं—कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में गए कितने वरिष्ठ नेता वापस आना चाहते हैं, तो उन्होंने बिना किसी हिचक के जवाब दिया कि “273 नेता घर वापसी करना चाहते हैं।” उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश से लगातार आवेदन आ रहे हैं और कई नेता कांग्रेस में फिर से शामिल होकर काम करने की इच्छा जता रहे हैं। इस दावे ने यह साफ संकेत दे दिया है कि बीजेपी में गए कई चेहरे अब राजनीतिक भविष्य को लेकर नए विकल्प तलाश रहे हैं।

पटवारी ने साफ किया कि पार्टी में वापसी का फैसला किसी एक व्यक्ति का नहीं होगा, बल्कि यह सामूहिक निर्णय होगा। उन्होंने कहा कि जिस विधानसभा क्षेत्र से नेता जुड़ा है, वहां के स्थानीय नेता, जिला अध्यक्ष और प्रदेश नेतृत्व मिलकर तय करेंगे कि किसे दोबारा पार्टी में शामिल किया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस केवल उन्हीं नेताओं को वापस लेगी, जिनकी वापसी से पार्टी को वास्तविक राजनीतिक लाभ होगा।

इस दौरान उन्होंने एक पुराना संदर्भ भी दिया और बताया कि पहले Kamal Nath ने 37 नेताओं की एक सूची दी थी, जो पार्टी में वापस आना चाहते थे। उस समय भी कांग्रेस नेतृत्व ने यही रुख अपनाया था कि किसी भी नेता की वापसी का फैसला सामूहिक रूप से लिया जाएगा, न कि व्यक्तिगत स्तर पर। इससे यह साफ होता है कि कांग्रेस अब “घर वापसी” को लेकर अधिक सतर्क और रणनीतिक दृष्टिकोण अपना रही है।

जब पत्रकार ने सीधा सवाल किया कि क्या इसका मतलब है कि बड़े स्तर पर घर वापसी होगी, तो पटवारी ने बिना किसी संकोच के कहा—“बिल्कुल होगी, और पूरे प्रदेश में होगी।” इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस आने वाले समय में संगठन को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर वापसी अभियान चला सकती है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयान सिर्फ एक दावा नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की राजनीति में संभावित बदलाव का संकेत भी हो सकता है। यदि वाकई इतने बड़े पैमाने पर नेता वापसी करते हैं, तो इससे प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस नेतृत्व किन नेताओं को हरी झंडी देता है और यह “घर वापसी” अभियान जमीन पर कितना असर डालता है।

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