राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 31 मार्च 2026
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़ते तनाव के बीच भारत की विदेश नीति को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के लिए यह जरूरी है कि वह अपने मित्र देशों की गलतियों पर भी खुलकर राय रखे और उन्हें टोकने का साहस दिखाए। एक बातचीत में खुर्शीद ने साफ कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंध केवल दोस्ती निभाने तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि नैतिकता और संतुलन भी उतना ही जरूरी है। उनके अनुसार, “अगर दोस्त गलती कर रहा है तो उसे बताना ही सच्ची दोस्ती है।” उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और कई बड़े देश अपने-अपने रणनीतिक हितों के आधार पर पक्ष ले रहे हैं।
खुर्शीद ने इशारों-इशारों में भारत की मौजूदा विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक मंच पर अपनी पारंपरिक छवि—जो संतुलन, स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर आधारित रही है—को बनाए रखना चाहिए। उनका मानना है कि भारत की पहचान केवल एक रणनीतिक शक्ति के रूप में नहीं, बल्कि एक नैतिक और जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में भी होनी चाहिए।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत को अपने मूल्यों—जैसे न्याय, शांति और मानवीय दृष्टिकोण—को प्राथमिकता देनी चाहिए। केवल आर्थिक या सामरिक हितों के आधार पर निर्णय लेना लंबे समय में देश की वैश्विक छवि को प्रभावित कर सकता है। खुर्शीद के मुताबिक, भारत की ताकत उसकी संतुलित सोच और सभी पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने की क्षमता में रही है।
पश्चिम एशिया जैसे संवेदनशील क्षेत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के इस इलाके में कई देशों के साथ मजबूत संबंध हैं। ऐसे में किसी एक पक्ष की ओर झुकाव दिखाना उचित नहीं होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को संतुलित रुख अपनाते हुए, जरूरत पड़ने पर स्पष्ट और ईमानदार संदेश देना चाहिए।
खुर्शीद ने यह भी संकेत दिया कि भारत को अपने पुराने कूटनीतिक अनुभव और बहुपक्षीय संबंधों का बेहतर इस्तेमाल करना चाहिए। उनके अनुसार, भारत चाहे तो क्षेत्र में तनाव कम करने और संवाद की पहल करने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत की भूमिका केवल एक दर्शक की नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति की होनी चाहिए जो शांति स्थापना में सक्रिय योगदान दे।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का सीधा असर भारत पर पड़ सकता है। खासकर तेल की आपूर्ति, व्यापारिक संबंधों और वहां रह रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ जाती है। ऐसे में विदेश नीति को लेकर देश के भीतर इस तरह की बहस का होना स्वाभाविक माना जा रहा है।
सलमान खुर्शीद का यह बयान साफ संकेत देता है कि भारत की विदेश नीति को लेकर देश के भीतर गंभीर मंथन चल रहा है। जहां एक ओर राष्ट्रीय हितों की रक्षा जरूरी है, वहीं दूसरी ओर नैतिकता, संतुलन और वैश्विक जिम्मेदारी को भी उतनी ही अहमियत देने की मांग उठ रही है।




