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वैश्विक आर्थिक तनाव बढ़ा: मध्य पूर्व संकट के असर में कई देशों ने सख्त कदम उठाए

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अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | ब्यूरो रिपोर्ट | 30 मार्च 2026

दुनिया भर में ऊर्जा संकट और मुद्रा दबाव के कारण आर्थिक अस्थिरता बढ़ रही है। पिछले कुछ दिनों में कई देशों ने आपात उपाय अपनाए हैं, जिनमें दुकानों के समय सीमित करना, मुद्रा बचाने के लिए विदेशी मुद्रा खर्च करना, वेतन कटौती और निर्यात पर पाबंदी शामिल हैं। ये कदम मुख्य रूप से मध्य पूर्व में चल रहे संकट (ईरान युद्ध से जुड़े तेल कीमतों में उछाल) के चलते उठाए गए लगते हैं। नीचे तथ्यों के आधार पर हाल की घटनाओं का सारांश:

मिस्र:
सरकार ने ऊर्जा बचत के लिए 28 मार्च से दुकानों, रेस्तरां, मॉल और कैफे को रात 9 बजे बंद करने का आदेश जारी किया है। यह एक महीने तक चलेगा। चार दिन पहले की बात नहीं, बल्कि फरवरी के अंत में आईएमएफ ने मिस्र को लगभग 2.3 अरब डॉलर की सहायता मंजूर की थी, जो आर्थिक सुधारों के बाद मिली।

तुर्की:
केंद्रीय बैंक ने लीरा को बचाने के लिए पिछले हफ्ते करीब 26-30 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा बिक्री की। स्वर्ण भंडार भी घटाए जा रहे हैं—पिछले दो हफ्तों में 58 टन से ज्यादा सोना बेचा या स्वैप किया गया। अब सोने के भंडार (कुल 135 अरब डॉलर के करीब) का इस्तेमाल बढ़ाने की चर्चा है।

पाकिस्तान:
27 मार्च को आर्थिक समन्वय समिति ने प्रधानमंत्री के ऑस्टरिटी फंड के लिए 100 अरब रुपये (लगभग 35.8 करोड़ डॉलर) की मंजूरी दी। ईंधन संकट के बीच वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन में 5-30% कटौती और सरकारी वाहनों के ईंधन में 50% कमी जैसे उपाय किए गए हैं।

रूस:
26 मार्च को राष्ट्रपति पुतिन ने दो डिक्री साइन कीं—1 अप्रैल से ईयू देशों में 1 लाख डॉलर से ज्यादा नकद ले जाने पर पाबंदी, और 1 मई से 100 ग्राम से भारी सोने की ईंटों के निर्यात पर रोक। यह छाया अर्थव्यवस्था और पूंजी पलायन रोकने के लिए है।

दक्षिण कोरिया:
26 मार्च को सरकार ने ईरान युद्ध से ऊर्जा कीमतों में उछाल के जवाब में 25 ट्रिलियन वॉन (लगभग 170 अरब डॉलर) का ‘वारटाइम’ सप्लीमेंट्री बजट तैयार करने का ऐलान किया। इसमें छोटे उद्योगों और आम लोगों को सहायता दी जाएगी।

लेबनान:
चल रहे युद्ध ने अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डाला है। विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक पिछला युद्ध 140 अरब डॉलर का नुकसान दे चुका था; मौजूदा संकट में रोजाना करीब 10 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त घाटा हो रहा है। मुद्रा (पाउंड) की 98% गिरावट पुरानी आर्थिक संकट (2023-24) की देन है, लेकिन युद्ध ने स्थिति और बिगाड़ी है।

भारत:
13 मार्च को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में ₹1 लाख करोड़ (लगभग 67-119 अरब डॉलर के बीच, रिपोर्ट्स में $6.2 बिलियन से $11.9 बिलियन तक उल्लेख) के आर्थिक स्थिरीकरण कोष का प्रस्ताव रखा। यह ग्लोबल हेडविंड्स, सप्लाई चेन डिसरप्शन और अप्रत्याशित झटकों से निपटने के लिए फिस्कल बफर बनाएगा।

इराक:
केंद्रीय बैंक ने पहले भी कई बैंकों पर डॉलर ट्रांजेक्शन प्रतिबंध लगाए थे (फरवरी 2026 में अपडेटेड लिस्ट); हाल में कोई नया 22 बैंकों वाला आदेश सामने नहीं आया। जुलाई 2026 से सरकारी संस्थानों में कैशलेस लेन-देन की खबर अभी पुष्ट नहीं।

ये घटनाएं एक साथ आ रही हैं और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट, मुद्रा दबाव तथा पूंजी सुरक्षा के संकेत दे रही हैं। अर्थशास्त्री इसे मध्य पूर्व तनाव का सीधा असर बता रहे हैं। भारत समेत कई देश फिस्कल हेडरूम बनाने की कोशिश कर रहे हैं। स्थिति पर नजर रखना जरूरी है—अभी कोई एक देश अकेला नहीं, पूरा सिस्टम दबाव में है।

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