भारत | ABC NATIONAL NEWS | सीकर | 28 मार्च 2026
राजस्थान के Sikar ज़िले के Guhala village में एक ऐसी पहल सामने आई है, जिसने सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश की है। करीब सात हजार की आबादी वाले इस गांव में एक हिंदू परिवार के पांच भाइयों ने नमाज़ियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अपनी ज़मीन का एक हिस्सा ईदगाह के लिए दान कर दिया। यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब ईद के मौके पर गांव में नमाज़ के लिए जगह कम पड़ रही थी।
गांव के मुख्य मार्ग पर स्थित इस इलाके में वर्षों से लोग साथ रहते आए हैं। गुहाला की पहचान उसकी पुरानी हवेलियों, परंपराओं और आपसी रिश्तों से जुड़ी रही है। इसी गांव में रहने वाले भोपाल राम सैनी और उनके चार भाइयों ने यह निर्णय लिया कि जब नमाज़ के लिए जगह की कमी हो रही है, तो समाधान भी स्थानीय स्तर पर ही निकाला जाना चाहिए। उन्होंने अपनी निजी ज़मीन का एक हिस्सा ईदगाह के विस्तार के लिए दे दिया, ताकि त्योहार के समय किसी को असुविधा न हो।
ईद के दिन जब बड़ी संख्या में नमाज़ी इकट्ठा हुए, तो इस पहल की व्यापक सराहना की गई। सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में सैनी परिवार का सम्मान किया गया और इस कदम को सामाजिक एकता का प्रतीक बताया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ ज़मीन दान करने का मामला नहीं है, बल्कि यह एक संदेश है कि गांव की जरूरतें और सामाजिक सौहार्द किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं होते।
गांव के बुजुर्गों और स्थानीय निवासियों का मानना है कि इस तरह के फैसले अचानक नहीं होते, बल्कि वर्षों से बने आपसी विश्वास और रिश्तों का परिणाम होते हैं। गुहाला गांव में हिंदू और मुस्लिम समुदाय लंबे समय से साथ रहते आए हैं और एक-दूसरे के त्योहारों और जरूरतों में सहयोग करते रहे हैं। यही वजह है कि जब ईदगाह के लिए जगह की जरूरत पड़ी, तो समाधान भी आपसी समझ और सहयोग से निकल आया।
इस पहल को क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर भी सराहा जा रहा है। ऐसे समय में जब अक्सर समाज में विभाजन की खबरें सामने आती हैं, गुहाला गांव की यह घटना एक अलग तस्वीर पेश करती है—जहां इंसानियत और भाईचारा प्राथमिकता बनते हैं। यह घटना इस बात का उदाहरण है कि अगर स्थानीय स्तर पर लोग मिलकर सोचें, तो कई सामाजिक चुनौतियों का समाधान बिना किसी विवाद के निकाला जा सकता है। Guhala village की यह पहल सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक संदेश है—कि विविधता के बीच भी एकता संभव है, और समाज की असली ताकत आपसी सहयोग और विश्वास में ही निहित है।




