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भारत के पास सीमित रणनीतिक तेल भंडार, सरकार बोली— हालात पूरे नियंत्रण में

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अंतरराष्ट्रीय/अर्थव्यवस्था | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 28 मार्च 2026

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच भारत के रणनीतिक तेल भंडार को लेकर नई जानकारी सामने आई है। एक विश्लेषण के अनुसार, देश के पास मौजूद रणनीतिक भंडार वर्तमान मांग को केवल कुछ दिनों तक ही पूरा कर सकते हैं, क्योंकि कुल भंडारण क्षमता का एक बड़ा हिस्सा अभी भी खाली पड़ा है। हालांकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल और डीज़ल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और हालात पूरी तरह से नियंत्रण में हैं। सरकार ने पहले जानकारी दी थी कि भारत की कुल तेल भंडारण क्षमता लगभग 74 दिनों की मांग को पूरा करने की है, जिसमें रिफाइनरियों और अन्य स्रोतों के स्टॉक भी शामिल हैं। लेकिन ऑडिट रिपोर्ट और उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, रणनीतिक भंडारण सुविधाओं का पूरा उपयोग लंबे समय से नहीं हो पाया है। इसका मतलब यह है कि आपात स्थिति में उपयोग होने वाला वास्तविक भंडार कागज़ी क्षमता से काफी कम हो सकता है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

इस बीच, देश के कई शहरों में ईंधन की कमी की आशंका के चलते लोगों ने एहतियातन पेट्रोल-डीज़ल की खरीद बढ़ा दी है। कुछ जगहों पर पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें भी देखने को मिली हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि आम लोगों के बीच चिंता का माहौल बन रहा है। हालांकि सरकार लगातार यह भरोसा दिला रही है कि किसी भी तरह की घबराने की जरूरत नहीं है और आपूर्ति सामान्य बनी हुई है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों—खासतौर पर Iran और Israel के बीच बढ़ते तनाव—का सीधा असर तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है। अगर हालात और बिगड़ते हैं या प्रमुख समुद्री मार्गों में बाधा आती है, तो भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए चुनौती और बढ़ सकती है। ऐसे में रणनीतिक भंडार का पूरा उपयोग और समय पर प्रबंधन बेहद अहम हो जाता है।

कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) की हालिया रिपोर्ट में भी इस बात की ओर इशारा किया गया था कि देश की रणनीतिक तेल भंडारण परियोजनाओं का उपयोग उनकी पूरी क्षमता के अनुरूप नहीं हो रहा है। यह मुद्दा अब इसलिए और महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ रही है और ऊर्जा सुरक्षा किसी भी देश के लिए प्राथमिक चिंता बन चुकी है।

फिलहाल सरकार का कहना है कि देश में तेल की कोई कमी नहीं है और सप्लाई चेन पूरी तरह सुचारु है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहते हैं, तो भारत को अपने रणनीतिक भंडार के उपयोग और विस्तार पर तेजी से काम करना होगा, ताकि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

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