अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | मॉस्को/ तेहरान / वाशिंगटन / तेल अवीव | 26 मार्च 2026
28 फरवरी 2026 को शुरू हुए अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद मध्य पूर्व का हालात दिन-प्रतिदिन बिगड़ता जा रहा है और अब युद्ध अपने 27वें दिन पहुंच चुका है। दोनों तरफ से मिसाइल और ड्रोन हमलों का सिलसिला जारी है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल के जहाजों की आवाजाही लगभग ठप पड़ गई है जिससे पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इस संकट के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को मॉस्को में एक व्यापारिक बैठक में साफ कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रहे इस युद्ध के परिणामों का अनुमान लगाना बेहद कठिन है। उन्होंने चेताया कि इस संघर्ष का असर न सिर्फ क्षेत्रीय स्तर पर बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा बाजार, धातु और उर्वरक क्षेत्र पर भी भारी पड़ रहा है और इसे कोविड महामारी जैसी बड़ी चुनौती से जोड़कर देखा जा सकता है। पुतिन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और इजरायल ईरान की सैन्य क्षमताओं को लगातार निशाना बना रहे हैं और ईरान भी जवाबी कार्रवाई से पीछे नहीं हट रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर ईरानी नेताओं पर कहा कि ईरान अब समझौते की भीख मांग रहा है क्योंकि उसकी सैन्य ताकत लगभग खत्म हो चुकी है। ट्रंप ने लिखा कि ईरानी अधिकारी सार्वजनिक रूप से केवल प्रस्ताव पर विचार करने की बात कर रहे हैं लेकिन असल में वे बहुत अलग और हताश स्थिति में हैं। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अगर ईरान जल्दी गंभीरता नहीं दिखाता तो परिणाम अच्छे नहीं होंगे और अमेरिका उसे पहले से भी ज्यादा जोरदार जवाब देगा। ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने की मांग की और कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो ईरान की ऊर्जा सुविधाओं पर हमले शुरू कर दिए जाएंगे। वहीं इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उनकी सेना ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स नेवी के प्रमुख कमांडर अलिरेजा तंगसीरी को मार गिराया है, जो होर्मुज ब्लॉकेड के मुख्य सूत्रधार थे। इजरायल का दावा है कि इस हमले से ईरान की नौसैनिक क्षमता को बड़ा झटका लगा है, हालांकि ईरान ने अभी इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
ईरान ने अमेरिका के युद्धविराम प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है और अपनी पांच शर्तें रखी हैं जिनमें हमले तुरंत बंद करना, सुरक्षा गारंटी देना, युद्ध में हुई क्षति का मुआवजा देना, क्षेत्रीय प्रतिरोध समूहों पर हमले रोकना और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरानी संप्रभुता को मान्यता देना शामिल है। ईरानी राज्य टेलीविजन पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उनका देश किसी भी खतरे के साये को स्वीकार नहीं करेगा और दुश्मनों को अंत में पछतावा ही होगा। ईरान ने दोस्त देशों जैसे चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान के जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे रखी है लेकिन बाकी शिपिंग पर सख्ती बरती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बार-बार अपील की है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखा जाए क्योंकि इससे न सिर्फ तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है बल्कि उर्वरक और अन्य जरूरी सामानों की आवाजाही भी रुक गई है। इस बीच खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) ने ईरान के हमलों और स्ट्रेट बंद करने की कार्रवाई की निंदा की और कहा कि ईरान ने सभी लाल रेखाओं को पार कर लिया है।
युद्ध के चलते तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 5 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है जबकि WTI क्रूड भी 100 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। कई विश्लेषकों का कहना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहा तो कीमतें और भी ऊंचाई छू सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के अनुसार 20,000 से ज्यादा नाविक फंस गए हैं और करीब 2,000 जहाज इस संकट से प्रभावित हुए हैं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उन्होंने एक अमेरिकी F/A-18 फाइटर जेट गिराया है लेकिन अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसे पूरी तरह झूठा और प्रचार बताया है। ईरान ने खाड़ी के कई देशों पर मिसाइल दागीं जिन्हें UAE और सऊदी अरब ने इंटरसेप्ट कर लिया। कुवैत के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर भी हमले की खबर आई जिसमें आग लग गई और कुछ लोगों की मौत की सूचना है। अमेरिकी एडमिरल ने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के मिसाइल, ड्रोन और नौसैनिक उत्पादन केंद्रों के दो-तिहाई से ज्यादा हिस्से को नष्ट या क्षतिग्रस्त कर दिया है और कुल 10,000 से ज्यादा टारगेट हिट किए गए हैं। ईरानी कमांडरों ने चेतावनी दी है कि अगर जमीन पर युद्ध हुआ तो अमेरिका और इजरायल के लिए यह बहुत महंगा और खतरनाक साबित होगा।
हूती विद्रोही भी इजरायल के खिलाफ लड़ाई में शामिल होने की तैयारी दिखा रहे हैं जबकि मिस्र पाकिस्तान और तुर्की की मदद से मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। ईरान के रेड क्रिसेंट सोसाइटी के मुताबिक युद्ध शुरू होने के बाद से 87,000 से ज्यादा रिहायशी और व्यावसायिक इमारतें क्षतिग्रस्त या तबाह हो चुकी हैं। दोनों पक्षों के बीच अभी तक जमीन पर सीधी लड़ाई नहीं हुई है लेकिन हवा और समुद्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देश चिंता जता रहे हैं। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर G7 बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा के लिए फ्रांस पहुंचे हैं। स्पेन के प्रधानमंत्री ने नेतन्याहू पर लेबनान को गाजा जैसा बनाने का आरोप लगाया है। विश्लेषक मानते हैं कि यह संघर्ष न सिर्फ मध्य पूर्व की स्थिरता को बिगाड़ रहा है बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर रहा है। पुतिन के शब्दों में कहें तो इस युद्ध के अंतिम परिणामों का अंदाजा लगाना अभी बहुत मुश्किल है और स्थिति तेजी से बदल रही है।



