राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 25 मार्च 2026
देश में LPG संकट के बीच अब पेट्रोल और डीजल को लेकर भी घबराहट का माहौल बनता दिख रहा है, और इस मुद्दे पर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता Supriya Shrinate ने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उनके हालिया बयान ने पूरे देश में “पैनिक” की स्थिति पैदा कर दी है। उनका कहना है कि जब देश पहले से ही रसोई गैस की किल्लत और महंगाई जैसी समस्याओं से जूझ रहा था, तब इस तरह के बयान ने आम आदमी की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है, जिसका असर अब सड़कों और पेट्रोल पंपों पर साफ नजर आ रहा है।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि पहले LPG की किल्लत के कारण लोग गैस एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी लाइनों में खड़े थे, और अब पिछले दो दिनों से देशभर से पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ और लंबी कतारों के वीडियो सामने आ रहे हैं। उनके मुताबिक, लोग डर और अनिश्चितता के माहौल में पेट्रोल-डीजल जमा करने में लगे हैं, क्योंकि उन्हें आशंका है कि आगे हालात और खराब हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री द्वारा “कोविड जैसी तैयारी” करने की बात कहने से लोगों में यह संदेश गया कि कोई बड़ा संकट आने वाला है, जिससे घबराहट और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
उन्होंने कोविड काल का हवाला देते हुए कहा कि उस दौर का कुप्रबंधन आज भी लोगों के मन में ताजा है, जब अचानक लिए गए फैसलों और लॉकडाउन ने लाखों लोगों की जिंदगी को प्रभावित किया था। श्रीनेत के अनुसार, उसी अनुभव के कारण अब लोग किसी भी ऐसे संकेत को गंभीरता से लेते हैं और एहतियात के नाम पर जरूरत से ज्यादा खरीदारी करने लगते हैं। उन्होंने नोटबंदी का उदाहरण देते हुए भी कहा कि यह पहली बार नहीं है जब सरकार के फैसलों या बयानों से लोगों को परेशानी हुई हो, बल्कि यह एक पैटर्न बनता जा रहा है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान बिना सोचे-समझे दिए जाते हैं और उनके असर का अंदाजा नहीं लगाया जाता। उनका कहना है कि देश के प्रधानमंत्री के हर शब्द का असर करोड़ों लोगों पर पड़ता है, इसलिए इस स्तर पर ज्यादा जिम्मेदारी और संवेदनशीलता जरूरी है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार यह समझती है कि उसके बयानों से बाजार, सप्लाई चेन और आम आदमी के व्यवहार पर कितना बड़ा प्रभाव पड़ता है।
हालांकि, सरकार की ओर से इस पूरे मुद्दे पर अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मौजूदा हालात यह जरूर दिखा रहे हैं कि लोगों के बीच एक तरह की बेचैनी और अनिश्चितता का माहौल बन गया है। अफवाहें तेजी से फैल रही हैं और लोग एहतियात के तौर पर जरूरी चीजों का स्टॉक करने में जुट गए हैं। एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि संकट के समय में नेतृत्व के शब्द कितने अहम होते हैं। क्योंकि जब शीर्ष स्तर से कोई बयान आता है, तो उसका असर सीधे आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है—और फिलहाल वही असर देशभर के पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों के बाहर दिखाई दे रहा है।




