राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 25 मार्च 2026
देश के कई हिस्सों से रसोई गैस (LPG) की किल्लत की खबरें सामने आने के बीच राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ गया है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी कतारें, घंटों इंतजार करते लोग और खाली हाथ लौटती महिलाएं—ये तस्वीरें अब आम हो चुकी हैं और आम आदमी की परेशानी को साफ दिखाती हैं। इसी मुद्दे को लेकर आज संसद परिसर में विपक्ष ने जोरदार प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। LPG की किल्लत ने कई जगहों पर हालात ऐसे बना दिए हैं कि घरों में चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं, छोटे दुकानदारों का काम ठप हो रहा है और मजदूर वर्ग तक प्रभावित हो रहा है। विपक्ष ने इसे सिर्फ सप्लाई की समस्या नहीं, बल्कि सरकार की नीतिगत विफलता बताया।
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष Mallikarjun Kharge के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के सांसदों ने एकजुट होकर विरोध जताया। संसद परिसर में नारे गूंजे—“नरेंद्र भी गायब, सिलेंडर भी गायब”, और नेताओं ने आरोप लगाया कि आम आदमी की सबसे जरूरी जरूरत—रसोई गैस—भी अब लोगों के लिए संकट बनती जा रही है। विपक्ष ने यह भी कहा कि सरकार की विदेश नीति और वैश्विक हालातों को संभालने में नाकामी का असर अब सीधे देश की रसोई तक पहुंच गया है।
विपक्ष का दावा है कि देश के कई राज्यों में LPG सिलेंडर की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसके कारण लोग गैस एजेंसियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। महिलाओं को सुबह से लाइन में लगना पड़ रहा है, फिर भी कई बार उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। यह स्थिति सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी को ठप कर देने वाली बनती जा रही है।
प्रदर्शन के दौरान विपक्ष ने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर भी तीखा हमला बोला। नेताओं ने आरोप लगाया कि जब देश के लोग बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तब सरकार की ओर से न तो कोई स्पष्ट जवाब आ रहा है और न ही कोई ठोस राहत दिखाई दे रही है। विपक्ष ने मांग की कि सरकार तुरंत स्थिति स्पष्ट करे, सप्लाई बहाल करे और जिम्मेदारी तय करे कि आखिर यह संकट पैदा क्यों हुआ।
हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि सप्लाई चेन में आई तकनीकी और लॉजिस्टिक दिक्कतों के कारण अस्थायी समस्या पैदा हुई है, जिसे जल्द ही ठीक करने का दावा किया जा रहा है।
यह पूरा मामला एक बड़े सवाल की ओर इशारा करता है—क्या देश में जरूरी सेवाओं की सप्लाई व्यवस्था इतनी कमजोर है कि थोड़ी सी बाधा से पूरा सिस्टम लड़खड़ा जाए? क्योंकि रसोई गैस केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की जिंदगी का आधार है। अगर यह ही प्रभावित हो जाए, तो उसका असर सीधे हर घर की रसोई और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है।
विपक्ष ने साफ संकेत दे दिया है कि वह इस मुद्दे को संसद तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि सड़क पर भी आंदोलन तेज करेगा। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने वाला है, अगर आम आदमी को राहत जल्दी नहीं मिलती।




