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नेहरू की विरासत पर चोट! सैनिक स्कूलों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी

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शिक्षा/राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 23 मार्च 2026

“देशभक्ति के मंदिरों को बेचने की साजिश”—कांग्रेस का सबसे बड़ा हमला

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए आरोप लगाया है कि सैनिक स्कूलों को सुनियोजित तरीके से निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस पूरे मुद्दे को देश की सुरक्षा और सैन्य परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि यह सिर्फ शिक्षा का मामला नहीं, बल्कि राष्ट्र की रक्षा व्यवस्था की आत्मा पर सीधा प्रहार है। कांग्रेस का दावा है कि सैनिक स्कूल दशकों से देशभक्ति, अनुशासन और बलिदान की भावना को गढ़ने वाले केंद्र रहे हैं, और उन्हें मुनाफे के मॉडल में बदलना देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

राजनाथ सिंह के ऐलान से भड़की राजनीति, PPP मॉडल पर सवालों की बौछार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा सैनिक स्कूल घोड़ाखाल से 100 नए सैनिक स्कूल खोलने के ऐलान ने इस विवाद को और भड़का दिया है। सरकार का कहना है कि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के जरिए अधिक छात्रों को सैन्य-प्रेरित शिक्षा का अवसर मिलेगा, लेकिन कांग्रेस इसे “विस्तार के नाम पर घुसपैठ” बता रही है। विपक्ष का आरोप है कि यह मॉडल धीरे-धीरे सैनिक स्कूलों की मूल संरचना को बदल देगा और सरकारी नियंत्रण कमजोर कर देगा, जिससे इन संस्थानों की निष्पक्षता और गरिमा पर असर पड़ेगा।

नेहरू के विजन पर ‘नीतिगत हमला’, इतिहास बनाम वर्तमान की टकराहट

कांग्रेस ने इस पूरे मुद्दे को जवाहरलाल नेहरू की विरासत से जोड़ते हुए कहा है कि सैनिक स्कूलों की स्थापना एक दूरदर्शी सोच का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य देश के युवाओं में नेतृत्व, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का विकास करना था। दशकों तक ये संस्थान रक्षा मंत्रालय के सीधे नियंत्रण में रहे और उनकी पहचान एक निष्पक्ष, राष्ट्रीय चरित्र निर्माण संस्थान के रूप में बनी। लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि मौजूदा सरकार इस ऐतिहासिक विरासत को बदलकर उसे निजी और वैचारिक हितों के अनुरूप ढालना चाहती है, जो देश के लिए खतरनाक संकेत है।

“दोस्तों को फायदा, सिस्टम पर कब्जा”—पुराने आरोपों को फिर हवा

कांग्रेस ने 2024 में उठाए गए अपने आरोपों को दोहराते हुए कहा कि PPP मॉडल के तहत हुए कई समझौते भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोगों और संस्थाओं को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए। मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे पत्र का हवाला देते हुए पार्टी ने दावा किया कि सरकारी सब्सिडी के जरिए निजी संस्थानों को आर्थिक फायदा पहुंचाया जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता से दूर है और इसका मकसद शिक्षा के नाम पर एक वैचारिक और आर्थिक नेटवर्क खड़ा करना है।

सरकार की दो टूक सफाई: “निजीकरण का झूठ, सिर्फ विस्तार की सच्चाई”

सरकार ने इन सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए साफ किया है कि देश के मौजूदा 33 सैनिक स्कूलों में किसी भी तरह का निजीकरण नहीं किया जा रहा है। राजनाथ सिंह ने कहा कि PPP मॉडल केवल नए 100 स्कूलों के लिए लागू होगा, ताकि ग्रामीण और मध्यम वर्ग के अधिक से अधिक बच्चों को इस प्रकार की शिक्षा का लाभ मिल सके। सरकार का दावा है कि सभी नए स्कूल सैनिक स्कूल सोसाइटी के नियमों, पाठ्यक्रम और अनुशासन का पालन करेंगे और किसी भी प्रकार का वैचारिक हस्तक्षेप नहीं होने दिया जाएगा।

सेना की तटस्थता बनाम राजनीति—बहस अब संवेदनशील मोड़ पर

कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि अगर सैनिक स्कूलों पर किसी विशेष विचारधारा का प्रभाव बढ़ता है, तो यह भविष्य में सेना की अ-पोलिटिकल परंपरा को प्रभावित कर सकता है। पार्टी का कहना है कि यह मुद्दा केवल शिक्षा का नहीं, बल्कि देश की सैन्य सोच और संस्थागत निष्पक्षता का है। वहीं सरकार इसे पूरी तरह खारिज करते हुए कह रही है कि यह कदम केवल अवसरों के विस्तार और युवाओं को सैन्य करियर के लिए तैयार करने की दिशा में उठाया गया है।

शिक्षा नीति से आगे, अब विचारधारा और विश्वास की लड़ाई

सैनिक स्कूलों को लेकर जारी यह विवाद अब केवल एक सरकारी योजना का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की शिक्षा, सुरक्षा और राजनीतिक विचारधारा के टकराव का केंद्र बन चुका है। एक तरफ सरकार इसे भविष्य की जरूरत और अवसरों के विस्तार के रूप में पेश कर रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस इसे संस्थागत बदलाव के जरिए एक बड़े वैचारिक एजेंडे की शुरुआत मान रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक और तेज होगा, जहां यह तय होगा कि सैनिक स्कूलों का भविष्य किस दिशा में जाएगा—विस्तार की ओर या विवाद की ओर।

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