अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान | 22 मार्च 2026
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक राजनीति का केंद्र बन गया है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव अब सीधे इस अहम समुद्री मार्ग तक पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी के बाद तेहरान ने भी स्पष्ट और सख्त रुख अपनाते हुए जवाब दिया है। ईरान ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य सभी देशों के जहाजों के लिए खुला रहेगा, लेकिन “ईरान के दुश्मनों से जुड़े जहाजों” को यहां से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह बयान सीधे तौर पर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। तेहरान का कहना है कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्री हितों से कोई समझौता नहीं करेगा।
दरअसल, यह पूरा विवाद तब और तेज हो गया जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शर्त के सभी जहाजों के लिए खोलना होगा। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा ढांचे, खासकर पावर प्लांट्स और तेल ठिकानों पर कार्रवाई कर सकता है। इस बयान ने क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और भड़का दिया।
ईरान की ओर से आए जवाब में यह भी स्पष्ट किया गया कि जो देश ईरान के खिलाफ नहीं हैं, उनके जहाजों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। लेकिन जिन देशों को तेहरान “विरोधी” मानता है, उनके जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाई जा सकती है। ईरानी अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जहाजों को उनकी एजेंसियों के साथ समन्वय करना होगा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ईरान इस मार्ग पर अपना प्रभाव बनाए रखना चाहता है।
इसके साथ ही ईरान ने अमेरिका को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि यदि उसके ऊर्जा ठिकानों या बुनियादी ढांचे पर हमला किया गया, तो वह भी जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। ईरान ने साफ किया कि उसकी प्रतिक्रिया सिर्फ क्षेत्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अमेरिका और उसके सहयोगियों के हितों को भी निशाना बनाया जा सकता है। इस चेतावनी ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से प्रतिदिन लाखों बैरल कच्चा तेल गुजरता है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा है। ऐसे में अगर यहां किसी भी तरह का अवरोध या सैन्य टकराव होता है, तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों, खासकर तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
मध्य पूर्व में पहले से ही कई मोर्चों पर तनाव बना हुआ है, जिसमें विभिन्न देशों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और सैन्य गतिविधियां शामिल हैं। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ता विवाद इस क्षेत्र को और अधिक अस्थिर बना सकता है। अमेरिका और ईरान दोनों ही अपने-अपने रुख पर अडिग नजर आ रहे हैं, जिससे कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं फिलहाल कमजोर दिखाई देती हैं।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि यह टकराव केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गंभीर रणनीतिक और आर्थिक हित जुड़े हुए हैं। यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो यह संकट न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह तनाव किस दिशा में जाता है और क्या कोई शांतिपूर्ण समाधान निकल पाता है या नहीं।




