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देश से बड़ा संघ? बार बार अमरिकी अपमानों पर चुप्पी, RSS पर प्रतिबंध के नाम से हड़कंप, विदेश मंत्रालय तुरंत सक्रिय —कांग्रेस

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राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 18 मार्च 2026

भारत और अमेरिका के बीच हालिया घटनाओं को लेकर देश की राजनीति में तीखी बहस छिड़ गई है। कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया है और कहा है कि जब-जब अमेरिका की तरफ से भारत या भारतीयों को लेकर विवादित बयान या कार्रवाई सामने आई, तब सरकार ने मौन व्रत पर रहती है। कांग्रेस का आरोप है कि भारतीय नागरिकों के साथ सख्ती, डिपोर्टेशन के दौरान जंजीरों में जकड़ कर अपमानजनक व्यवहार, व्यापार को लेकर अमेरिका की टिप्पणियां और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को लेकर दिए गए बयान—इन सभी मामलों में सरकार की प्रतिक्रिया बेहद सीमित या लगभग न के बराबर रही। पार्टी का कहना है कि ऐसे मुद्दों पर देश की गरिमा और संप्रभुता का सवाल जुड़ा होता है, इसलिए सरकार को स्पष्ट और मजबूत प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी।

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यह केवल कूटनीति का सवाल नहीं, बल्कि देश के सम्मान का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्थिति को मजबूती से रखने में विफल रही है। कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर देश से जुड़े अहम मुद्दों पर चुप्पी साधी जाती है और कुछ खास संगठनों से जुड़े मामलों पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जाती है, तो यह नीति पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने इसे दोहरा रवैया बताते हुए कहा कि सरकार को हर मुद्दे पर एक समान और संतुलित रुख अपनाना चाहिए।

यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब एक अमेरिकी संस्था की रिपोर्ट में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर सिफारिशें सामने आईं। इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए रिपोर्ट को “पूरी तरह पक्षपाती और अस्वीकार्य” बताया। कांग्रेस ने इसी त्वरित प्रतिक्रिया को लेकर सवाल उठाया है कि जब देश से जुड़े अन्य संवेदनशील मुद्दों पर सरकार शांत रहती है, तो इस मामले में इतनी तेजी क्यों दिखाई गई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इससे यह संदेश जाता है कि सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट नहीं हैं और कुछ मुद्दों को अधिक महत्व दिया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पूरा विवाद केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की विदेश नीति, राष्ट्रीय सम्मान और आंतरिक राजनीतिक संतुलन से जुड़ा हुआ है। एक ओर सरकार अपने कूटनीतिक दृष्टिकोण को संतुलित और रणनीतिक बताती है, वहीं विपक्ष इसे कमजोर और चयनात्मक प्रतिक्रिया करार दे रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा संसद से लेकर सार्वजनिक मंचों तक और ज्यादा गर्मा सकता है, क्योंकि इसमें भावनात्मक और राजनीतिक दोनों पहलू जुड़े हुए हैं।

ABC NATIONAL NEWS की पड़ताल के मुताबिक, अब यह सवाल आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन रहा है कि क्या सरकार हर अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर समान रूप से सक्रिय है या फिर प्राथमिकताओं में अंतर है। फिलहाल सरकार की ओर से इस पूरे विवाद पर विस्तृत राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विदेश मंत्रालय अपने आधिकारिक रुख पर कायम है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में जाता है और क्या सरकार इस पर कोई व्यापक स्पष्टीकरण देती है या नहीं।

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