एबीसी नेशनल न्यूज | गुवाहाटी | 11 मार्च 2026
असम सरकार के एक फैसले ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। राज्य की कैबिनेट ने Fakhruddin Ali Ahmed के नाम पर बने मेडिकल कॉलेज का नाम बदलने का निर्णय लिया है, जिसके बाद विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में फैसला किया गया कि फखरुद्दीन अली अहमद मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, बरपेटा का नाम बदलकर बरपेटा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल किया जाएगा। सरकार का कहना है कि पूर्व राष्ट्रपति के सम्मान में राज्य में किसी अन्य संस्थान का नाम उनके नाम पर रखा जाएगा।
हालांकि इस फैसले के बाद विपक्षी दलों ने इसे लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष का आरोप है कि देश के पूर्व राष्ट्रपति और असम के पहले राष्ट्रपति रहे फखरुद्दीन अली अहमद के नाम से किसी संस्थान का नाम हटाना सम्मान नहीं बल्कि इतिहास के साथ छेड़छाड़ है। कई नेताओं ने इसे “गंदी मानसिकता वाली राजनीति” करार देते हुए कहा कि महान हस्तियों के नाम पर बने संस्थानों को हटाकर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की जा रही है।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि फखरुद्दीन अली अहमद केवल एक राजनीतिक व्यक्ति नहीं थे, बल्कि भारतीय गणराज्य के सर्वोच्च पद पर रहे और असम से देश के पहले राष्ट्रपति बने। ऐसे में उनके नाम से जुड़े संस्थान को हटाना राज्य और देश के इतिहास के प्रति असम्मान का संकेत देता है।
दूसरी ओर असम सरकार का कहना है कि यह फैसला किसी भी तरह से पूर्व राष्ट्रपति के सम्मान को कम करने के उद्देश्य से नहीं लिया गया है। सरकार का तर्क है कि फखरुद्दीन अली अहमद के योगदान को देखते हुए राज्य में किसी अन्य महत्वपूर्ण संस्थान का नाम उनके नाम पर रखा जाएगा, जिससे उन्हें उचित सम्मान दिया जा सके।
इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में तीखी बहस शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नाम बदलने जैसे फैसले अक्सर प्रतीकात्मक राजनीति का हिस्सा बन जाते हैं और इससे राजनीतिक दलों के बीच टकराव और तेज हो जाता है। फिलहाल असम में यह मुद्दा सियासी और सामाजिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।




