एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 11 मार्च 2026
संसद की कार्यवाही के दौरान भी गूंजा नारा
संसद के बजट सत्र के बीच राजनीतिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है और इसी बीच एक नया सियासी नारा तेजी से चर्चा के केंद्र में आ गया है— “नाम नरेंदर – काम सरेंडर”। विपक्षी दलों के सांसदों द्वारा यह नारा अब केवल विरोध प्रदर्शनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संसद की कार्यवाही के दौरान भी बार-बार सुनाई दे रहा है। लोकसभा और राज्यसभा में जब विभिन्न मुद्दों पर बहस और हंगामा हुआ तो विपक्षी सांसदों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इसी नारे को दोहराया। कई मौकों पर सदन में कार्यवाही के बीच विपक्ष की तरफ से यह नारा लगाए जाने से माहौल और अधिक तीखा हो गया और सदन की कार्यवाही प्रभावित होने की स्थिति भी बनी।
संसद परिसर में भी जारी है विरोध और नारेबाजी
संसद भवन के बाहर और पूरे संसद परिसर में भी विपक्षी सांसदों और कार्यकर्ताओं द्वारा इस नारे को लगातार दोहराया जा रहा है। विभिन्न मुद्दों को लेकर जब विपक्ष ने विरोध प्रदर्शन किए तो उनके हाथों में तख्तियां और पोस्टर दिखाई दिए, जिन पर सरकार के खिलाफ तीखे संदेश लिखे थे। इन्हीं प्रदर्शनों के दौरान बार-बार “नाम नरेंदर – काम सरेंडर” का नारा सुनाई दिया, जिससे यह नारा विरोध की एक पहचान बनता दिखाई दे रहा है। कई विपक्षी सांसदों का कहना है कि यह नारा सरकार की नीतियों के खिलाफ उनके राजनीतिक संदेश को सीधे और तीखे तरीके से सामने लाने का माध्यम है।
कांग्रेस नेताओं ने भी अपनाया यह नारा
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस नारे का उल्लेख करते हुए कहा है कि विपक्ष संसद के भीतर और बाहर सरकार से जवाब मांगता रहेगा। कांग्रेस का कहना है कि यह नारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली पर राजनीतिक व्यंग्य है और इसके जरिए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। पार्टी नेताओं का दावा है कि यह नारा केवल राजनीतिक मंचों तक सीमित नहीं है बल्कि आम जनता के बीच भी चर्चा का विषय बन चुका है।
प्रियंका गांधी के धरने में भी सुनाई दी इसकी गूंज
संसद परिसर में निलंबित सांसदों के समर्थन में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की मौजूदगी में भी यह नारा जोर-शोर से लगाया गया। धरने में शामिल सांसदों और कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए इसे कई बार दोहराया। इस दौरान सामने आए वीडियो और तस्वीरों में विपक्षी नेता और कार्यकर्ता एक साथ नारे लगाते दिखाई दे रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह नारा विपक्षी राजनीति का एक प्रमुख प्रतीक बनता जा रहा है।
सोशल मीडिया पर भी ट्रेंड कर रहा है नारा
संसद के अंदर और बाहर उठे इस नारे ने सोशल मीडिया पर भी बड़ी तेजी से जगह बना ली है। कई विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर वीडियो और पोस्ट साझा किए हैं, जिनमें संसद परिसर और विरोध प्रदर्शनों के दौरान लगाए जा रहे इन नारों को दिखाया गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर #NaamNarendarKaamSarrendar जैसे हैशटैग के साथ यह नारा तेजी से फैल रहा है और राजनीतिक बहसों में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।
राजनीतिक सवालों के साथ सोशल मीडिया पर तीखी टिप्पणी
सोशल मीडिया पर इस नारे के साथ-साथ सरकार पर सवाल उठाने वाले कई पोस्ट भी सामने आए हैं। कुछ पोस्टों में प्रधानमंत्री की कार्यशैली को लेकर सवाल पूछे गए हैं—क्या सरकार आलोचना से डरती है? क्या मीडिया के सवालों से बचा जा रहा है? क्या बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत की स्थिति कमजोर हुई है? ऐसे सवालों के साथ कई यूजर्स ने जवाबदेही, पारदर्शिता और लोकतंत्र की मजबूती की मांग भी उठाई है। हालांकि इन टिप्पणियों पर सत्ता पक्ष की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही हैं।
बजट सत्र में और तेज हो सकती है राजनीतिक टकराव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद के मौजूदा बजट सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो सकता है। विपक्ष सरकार को विभिन्न आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर घेरने की कोशिश कर रहा है और इस नारे को उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले दिनों में संसद की बहसों, विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक कार्यक्रमों में यह नारा और अधिक सुनाई दे सकता है।
फिलहाल संसद के अंदर, संसद परिसर और सोशल मीडिया—तीनों जगह एक ही नारा लगातार चर्चा में है:
“नाम नरेंदर – काम सरेंडर!”
“नाम नरेंदर – काम सरेंडर!”




